Uttarakhand Tunnel Collapse Latest Update: पिछले 10 दिनों से उत्तरकाशी की सिल्कयारा सुरंग के अंदर फंसे श्रमिकों के फोटो मंगलवार सुबह सबके सामने आ गए। जिससे चिंतित रिश्तेदारों में नई उम्मीद जगी हैए जिनमें से कुछ मलबे के बाहर डेरा डालकर बैठे हैं। आज बचाव दल ने टनल में एक एंडोस्कोपी कैमरा डाला। जिसके बाद पूरे देश को पता चला कि टनल में फंसे श्रमिकों के पास घूमने और पर्याप्त जगह और रोशनी है।
एक्सपर्ट ने जब टनल में फंसे श्रमिकों से वाॅकी-टाॅकी के जरिए बात की तो मजदूरों ने कैमरे को अपने सामने करते हुए कहा कि वे स्वस्थ हैं। बता दें कि मजदूरों को बाहर निकालने के लिए आज टनल के तीन ओर ड्रिलिंग शुरू हो सकती है। इसके लिए मशीनें पहुंच चुकी है। वहीं विदेशी एक्सपर्ट की मदद भी ली जा रही है। वे भी मौके पर मौजूद हैं।
मजदूर की पत्नी बोलीं- हमें उम्मीद जगी है
फंसे हुए मजदूरों में से एक की पत्नी ने न्यूज एजेंसी एएनआई को बताया कि बचाव दल द्वारा आज जारी की गई तस्वीरों को देखने के बाद हमें उम्मीद जगी है कि वे जल्द ही बाहर निकलेंगे। उन्होंने कहा कि वीडियो में मैं अपने पति को नहीं देख पाई लेकिन मुझे पता है टनल में मौजूद सभी मजदूर सुरक्षित हैं। हमें उम्मीद जगी है कि उन्हें जल्द ही बचा लिया जाएगा।
6 इंच चौड़ी पाइपलाइन के जरिए भेजी खिचड़ी
बता दें कि सोमवार को फंसे हुए टनल में 6 इंच चैड़ी पाइपलाइन डाली गई। जिसके माध्यम से मजदूरों को खिचड़ी भेजी गई। इससे पहले मजदूर अब तक सूखे मेवे, मुरमुरे और चने पर गुजारा कर रहे थे। बचाव अभियान के प्रभारी कर्नल पाटिल ने बताया कि मजदूरों के बंद पड़े फोन को चालू करने के लिए पाइप के जरिए मोबाइल चार्जर अंदर भेजे जाएंगे।
12 नवंबर से फंसे हैं 41 मजदूर
बता दें कि 12 नवंबर को सुबह 4 बजे यह हादसा हुआ था। इस टनल के 200 मीटर अंदर 60 मीटर तक मलबा धंस गया है। इससे 41 मजदूर अंदर फंस गए हैं। रेस्क्यू के दौरान भी मलबा गिरा जिससे अब मलबा 70 मीटर तक फैल गया है। टनल में फंसे मजदूर यूपीए पश्चिम बंगालए उत्तराखंडए हिमाचल प्रदेशए बिहार और झारखंड के हैं। फंसे लोगों में सर्वाधिक मजदूर झारखंड के हैं।