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300 एनकाउंटर कर चुके बिहार के असली सिंघम प्रशांत कुमार कौन? जो बन सकते हैं UP के नए DGP

IPS Prashant Kumar: उत्तर प्रदेश सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति को लेकर नई नियमावली जारी की थी। जिसके ऊपर पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने सवाल उठाए हैं। नए डीजीपी को लेकर प्रशांत कुमार का नाम चर्चा में है। उनके बारे में विस्तार से जानते हैं।

IPS Prashant Kumar Story: उत्तर प्रदेश सरकार ने नए डीजीपी के चयन को लेकर एक अहम नियमावली को मंजूरी दी है। सोमवार देर रात को कैबिनेट बैठक में मंजूरी के बाद अब इस फैसले पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने भी निशाना साधा है। नए डीजीपी के तौर पर प्रशांत कुमार के नाम की चर्चा चल रही है। प्रशांत कुमार इस समय यूपी के कार्यवाहक डीजीपी हैं। अगले साल मई में उनको रिटायर होना है। प्रशांत कुमार तमिलनाडु कैडर के 1990 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। उनकी गिनती तेजतर्रार अधिकारियों में होती है। वे मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के रहने वाले हैं। कहा जाता है कि वे अब तक 300 एनकाउंटर कर चुके हैं। उनको एनकाउंटर स्पेशलिस्ट भी कहा जाता है। यह भी पढ़ें:‘चुनाव में मेरी हत्या की साजिश रची गई…’, मंत्री अनिल विज के आरोपों से हरियाणा में सनसनी प्रशांत कुमार पढ़ाई में भी अव्वल रहे हैं। उनके पास 3-3 मास्टर डिग्रियां हैं। उनका जन्म 16 मई 1965 को हुआ था। तमिलनाडु कैडर से तबादला करवाने के बाद उन्होंने 1994 में यूपी कैडर ज्वाइन किया था। वे क्राइम के खिलाफ कई बड़े फैसले लेकर चर्चा में आ चुके हैं। प्रशांत कुमार डिजास्टर मैनेजमेंट से एमबीए कर चुके हैं। वे अप्लाइड जूलॉजी में एमएससी कर चुके हैं। वहीं, डिफेंस और स्ट्रैटेजिक स्टडीज में एफफिल की डिग्री भी हासिल कर चुके हैं। उन्हें पुलिस विभाग में असली सिंघम के तौर पर जाना जाता है।

4 बार पा चुके हैं बहादुरी पुरस्कार

प्रशांत कुमार अब तक चार बार बहादुरी पुरस्कार हासिल कर चुके हैं। उन्हें 2020, 2021, 2022 और 2023 में लगातार चार बार राष्ट्रपति से पुलिस मेडल मिल चुका है। प्रशांत कुमार 2017 में मेरठ जोन के एडीजी के तौर पर चर्चा में आए थे। इस दौरान उन्होंने एक किडनैपिंग केस को सॉल्व किया था। दिल्ली के मेट्रो अस्पताल के डॉक्टर श्रीकांत गौड़ का अपहरण किया गया था। उनको छोड़ने के एवज में 5 करोड़ की फिरौती मांगी गई थी। लेकिन प्रशांत कुमार ने न केवल गौड़ को सकुशल छुड़वा लिया, बल्कि बदमाशों को सलाखों के पीछे डालने में भी अहम भूमिका निभाई। ऐसे कितने ही केस वे अब तक सुलझा चुके हैं। ये भी पढ़ें: जाको राखे साइयां, मार सके न कोई… जन्म लेते ही कलयुगी मां ने 50 फीट ऊंचे पुल से फेंका, फिर भी नहीं हारी जंग


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