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सपा सांसद रामजीलाल ने क्यों मांगी माफी? जानें माफीनामे की इनसाइड स्टोरी

यूपी में सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने गुरुवार सुबह पत्र जारी कर अपने बयान के लिए माफी मांग ली। सपा सांसद ने कहा कि मेरे वक्तव्य से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। जबकि मेरा ऐसा कोई इरादा नहीं था। ऐसे में आइये जानते हैं इस माफीनामे की इनसाइड स्टोरी क्या है?

SP MP Ramjilal Suman Rana Sanga controversy
सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने राणा सांगा विवाद मामले में गुरुवार सुबह बयान जारी कर माफी मांग ली। उन्होंने पत्र जारी कर कहा कि मेरे वक्तव्य से कुछ लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं, जबकि ऐसा मेरा कोई इरादा नहीं था। इससे पहले बुधवार शाम को सपा सांसद के आगरा स्थित घर पर करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने धावा बोल दिया। ऐसे में सियासी गलियारों में चर्चा है कि सपा सांसद के यूटर्न के पीछे किसका हाथ है? इसके पीछे सपा की क्या रणनीति है? आइये जानते हैं माफीनामे की इनसाइड स्टोरी।

सपा प्रमुख ने किया हस्तक्षेप

सपा सांसद रामजीलाल सुमन के बयान के बाद से ही यूपी-राजस्थान समेत कई राज्यों में सियासत गरमाई हुई थी। बीजेपी ने इस मुद्दे को जोर शोर से उछाला। बीजेपी के राजपूत विधायकों ने इस मामले में जमकर सपा की ओलाचना की। उनके बयान के बाद से ही सपा और अखिलेश यादव बैकफुट पर थे। राणा सांगा के बलिदान से पूरा भारत वाकिफ है। ऐसे में सांसद सुमन के बयान से सपा चौतरफा गिर गई थी। सूत्रों की मानें तो पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने देर रात रामजीलाल से इस मुद्दे पर बात की। सपा प्रमुख ने इस मुद्दे पर बयान को वापस लेने और स्पष्टीकरण जारी करने की बात सांसद सुमन से कही। ऐसे में आज सपा सांसद ने सोशल मीडिया पर लेटर जारी कर अपना स्पष्टीकरण दिया। ये भी पढ़ेंः राणा सांगा मामले में सपा सांसद रामजीलाल सुमन ने माफी मांगी, करणी सेना के खिलाफ मामला दर्ज

ठाकूर वोट बैंक खिसकने का डर

यूपी में सपा ने लोकसभा चुनाव 2024 में पीडीए की राजनीति की। सपा का यह दांव सफल रहा। पार्टी को चुनाव में 37 सीटों पर जीत मिली। जबकि बीजेपी 62 से 33 सीटों पर आ गई। सपा ने लोकसभा चुनाव से पहले तीन प्रमुख जातियों पर जोर देना शुरू कर दिया था। पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक। इन्हीं जातियों के दम पर सपा ने 2024 चुनाव में जीत की पटकथा लिखी। उन्होंने बीजेपी गठबंधन से 6 सीटें अधिक जीती।

यूपी में 55 सीटों पर सीधा प्रभाव

सूत्रों की मानें तो रामजीलाल की टिप्पणी के बाद सपा को ठाकुर और राजपूत वोट बैंक के खिसकने का डर था। ऐसे में पार्टी प्रमुख ने सांसद को फोन कर विस्तृत स्पष्टीकरण के साथ बयान वापस लेने को कहा था। बता दें कि यूपी में राजपूत वोटर्स 6-7 प्रतिशत है। जोकि करीब 40-55 सीटों पर अपना दबदबा रखते हैं। ऐसे में सपा के लिए यह बयान कुछ दिनों बाद ही सही नासूर बन सकता था। ये भी पढ़ेंः ‘मस्जिदों-मजारों पर बुलडोजर चल रहे…’, सपा नेता ने बताई सौगात-ए-मोदी की असल वजह


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