Prayagraj Magh Mela News: प्रयागराज माघ मेले में आज मौनी अमावस्या के मौके पर संगम तट पर तब बवाल मच गया, जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने मौनी अमावस्या के मौके पर पवित्र स्नान करने से इनकार कर दिया. वे अपनी पालकी में शिष्यों के साथ संगम नोज की ओर बढ़ रहे थे कि अचानक उन्होंने अपनी पालकी वापस करवा ली और बीच रास्ते से ही अपने शिविर में लौट गए. उन्होंने स्नान करने से भी इनकार कर दिया.
प्रयागराज पुलिस कमिश्नर ने बताई वजह
प्रयागराज के पुलिस कमिश्नर जोगिंदर कुमार ने पूरे घटनाक्रम पर प्रकाश डालते हुए बताया कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद 9 बजे रथ और पालकी से बैरियर नंबर 2 को तोड़ संगम नोज तक आए थे. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद करीब 200 लोगों के साथ रथ और पालकी लेकर आए थे. उस वक्त संगम नोज पर लाखों बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं मौजूद थे. स्वामी जी उस समय 200 लोगों के साथ पालकी संगम नोज ले जाने की जिद कर रहे थे जब संगम नोज पर तिल रखने की जगह नहीं थी. हमने संगम नोज तक पैदल जाने के लिए अनुरोध किया था. आज वीवीआइपी स्नान पर पूरी तरह से रोक थी.
गृह सचिव पर लगाए मारपीट के आरोप
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि वे उत्तर प्रदेश सरकार के गृह सचिव मोहित गुप्ता से नाराज हैं, क्योंकि उन्होंने उनके शिष्यों के साथ मारपीट और धक्का मुक्की की, जबकि वे शांतिपूर्ण तरीके से उनके साथ माघ मेले में जा रहे थे, लेकिन मोहित गुप्ता की मौजूदगी में शिष्यों के साथ मारपीट हुई है. भीड़ को कंट्रोल करने के लिए तैनात किए गए जवानों को लोगों को मारने का कहा जा रहा है. खुद मोहित गुप्ता ने उनका दमन करने को कहा.
धक्का मुक्की का वीडियो हुआ वायरल
बता दें कि संगम तट पर शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों से मारपीट और धक्का मुक्की का एक वीडियो वायरल हुआ है. जिसके अनुसार, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपनी पालकी में संगम तट की ओर बढ़ रहे हैं और साथ में उनके शिष्यों का रेला भी है, लेकिन रास्ते में गृह सचिव मोहित गुप्ता और कई पुलिसकर्मी उन्हें रोकते हैं और स्नान करने के लिए आगे जाने से मना करते हैं. विरोध करने पर जवानों ने बल का प्रयोग किया.
मामले में पुलिस ने रखा अपना पक्ष
मोहित गुप्ता और पुलिस कर्मियों का शिष्यों के साथ रवैया देखकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने स्नान करने से मना कर दिया और बीच रास्ते से ही वे अपनी पालकी वापस ले गए, वहीं पुलिस ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों को टुकड़ों-टुकड़ों में संगम नोज की ओर जाने को कहा गया था, लेकिन वे एक साथ भीड़ का रूप लेकर आगे बढ़ रहे थे, ऐसे में उन्हें रोकना पड़ा, लेकिन वे पुलिसवालों से भिड़ गए.
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