Noida News: नोएडा के बाजारों में पार्किंग की समस्या अब जल्द ही खत्म होने वाली है. नोएडा प्राधिकरण ने इसका स्थायी समाधान निकालते हुए शहर में ऑटोमेटेड पजल पार्किंग विकसित करने की योजना बनाई है. पहले चरण में इसकी शुरुआत सेक्टर-62 से की जा रही है, जहां आधुनिक तकनीक से युक्त 4 मंजिला पजल पार्किंग का निर्माण किया जाएगा.
13.96 करोड़ की लागत, 100 वाहनों की क्षमता
प्राधिकरण की योजना के तहत सेक्टर-62 में बनने वाली यह पजल पार्किंग करीब 13.96 करोड़ की लागत से तैयार होगी. इसमें चार फ्लोर होंगे और कुल 100 गाड़ियों की पार्किंग की सुविधा होगी. खास बात यह है कि यह पारंपरिक मल्टीलेवल या हाइड्रोलिक पार्किंग की तुलना में कम जगह घेरती है और कार पार्किंग का समय भी बेहद कम होता है.
कैसे काम करती है पजल पार्किंग ?
पजल पार्किंग सिस्टम का संचालन पूरी तरह ऑटोमेटेड होता है. यह एक पजल गेम की तरह काम करती है जिसमें पार्किंग स्लॉट ऊपर-नीचे और दाएं-बाएं मूवेबल होते हैं. जब कोई वाहन पार्किंग में आता है तो उसे एक स्टैंड पर खड़ा किया जाता है. सिस्टम सेंसर की मदद से उस वाहन को तय फ्लोर पर भेजता है. इसी तरह जब वाहन को निकाला जाता है तो वही प्रक्रिया उलट कर पूरी की जाती है. इस पूरी प्रक्रिया में महज 3 से 6 मिनट का समय लगता है.
पारंपरिक पार्किंग के मुकाबले तेजी
सामान्य मल्टीलेवल पार्किंग में एक वाहन को लगाने और निकालने में 15 से 20 मिनट तक लग सकते हैं, वहीं पजल पार्किंग में यह काम तीन गुना तेजी से पूरा होता है. इससे बाजारों में पार्किंग के कारण लगने वाला ट्रैफिक जाम भी कम होगा.
सुरक्षा में हाईटेक
इस पजल पार्किंग में हाईटेक सुरक्षा सिस्टम भी शामिल है. पार्किंग जोन के अंदर यदि कोई बच्चा या जानवर गलती से प्रवेश करता है, तो सेंसर वाहन की मूवमेंट को रोक देगा, जिससे दुर्घटना की संभावना नहीं के बराबर होगी. पार्किंग की सीमाओं को पीली लाइन से चिह्नित किया जाएगा.
दो और स्थानों पर भी योजना
प्राधिकरण की योजना सेक्टर-62 के अलावा दो अन्य स्थानों पर भी ऐसी पजल पार्किंग बनाने की है. संभावित स्थानों की पहचान की जा रही है. इससे बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में पार्किंग की बड़ी समस्या से निजात मिलेगी.
निर्माण के लिए मांगे गए आवेदन
नोएडा प्राधिकरण ने पजल पार्किंग के निर्माण के लिए इच्छुक कंपनियों से 30 अक्टूबर तक आवेदन मांगे हैं. 31 अक्टूबर को तकनीकी बिड खोली जाएंगी. चयनित कंपनी को एक साल तक इसका संचालन भी करना होगा, जिसके बाद पार्किंग को प्राधिकरण को हैंडओवर किया जाएगा.
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