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नोएडा एयरपोर्ट की जमीन पर नहीं मिला कब्जा, अथॉरिटी की टीम को मशीनों के साथ खदेड़ा

Noida International Airport: यमुना अथॉरिटी की टीम मंगलवार को नोएडा एयरपोर्ट के लिए प्रस्तावित जमीन पर कब्जा लेने के लिए पहुंची। इस दौरान टीम को किसानों ने घेर लिया और नारेबाजी शुरू कर दी। बताया जा रहा है कि किसानों का उग्र रूप देखकर अथॉरिटी टीम के होश उड़ गए।

नोएडा एयरपोर्ट की जमीन पर यमुना अथॉरिटी को नहीं मिला कब्जा
Noida International Airport: नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के लिए प्रस्तावित जमीन पर कब्जा करने पहुंची यमुना अथॉरिटी की टीम को किसानों के गुस्से का सामना करना पड़ा। किसानों ने समस्याओं का समाधान नहीं होने तक जमीन पर कब्जा देने से मना कर दिया। इस दौरान किसानों ने अथॉरिटी के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। किसानों के विरोध के कारण कर्मचारियों को मशीनों के साथ वापस लौटना पड़ा।

किसानों ने अथॉरिटी के खिलाफ की नारेबाजी

यमुना अथॉरिटी क्षेत्र में सेक्टर निर्माण के लिए अकालपुर, म्याना और मकसूदपुर गांव निवासी किसानों में मुआवजा वितरण किया जा रहा है। कई किसानों ने आपसी सहमति से अथॉरिटी को जमीन बेच दी है। वहीं, कुछ किसान ऐसे भी हैं, जो अधिग्रहण प्रक्रिया से नाखुश हैं। वे अधिग्रहण का विरोध कर आंदोलन कर रहे हैं। अथॉरिटी के कर्मचारी मंगलवार को जेसीबी मशीनों के साथ मकसूदपुर गांव में खरीदी गई जमीन पर कब्जा करने पहुंचे। किसानों को इसकी भनक लग गई। किसानों ने मौके पर पहुंचकर मशीनों को रोक दिया और कार्रवाई का विरोध कर अथॉरिटी के खिलाफ नारेबाजी की।

एक इंच भी जमीन पर नहीं देंगे कब्जा

किसानों ने कहा कि जब तक तीनों गांवों की सभी समस्याओं पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं होगी, तब तक वे एक इंच भी जमीन पर कब्जा नहीं करने देंगे। किसानों के विरोध को देखते हुए कर्मचारी मशीनों के साथ लौट गए। किसानों का कहना है कि जब तक आबादी निस्तारण समेत उनकी मांगों को नहीं माना जाएगा, तब तक एक इंच भी जमीन अथॉरिटी को कब्जाने नहीं दी जाएगी। यमुना अथॉरिटी द्वारा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास प्रस्तावित सेक्टर-10 के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है।

पंचायत कर दी चेतावनी

पंचायत में किसानों ने अथॉरिटी पर मनमानी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अभी तक गांव में सभी किसानों को पूरी तरह से मुआवजा भी वितरित नहीं हुआ। इसके बावजूद जमीन पर जबरन कब्जा किया जा रहा है। अभी आबादी का निपटारा और आपसी सहमति से ली गई जमीन के बदले मिलने वाले प्लॉट के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया गया है। किसानों का आरोप है कि अथॉरिटी स्थानीय किसानों को उजाड़कर यहां पूंजीपतियों को बसाना चाहता है। किसानों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ी तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।


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