नोएडा के सेक्टर 150 में हुए इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में आरोपित लोटस ग्रीन्स बिल्डर के मालिक निर्मल सिंह की गिरफ्तार एक हफ्ते बाद भी नहीं हो पाई है. पुलिस और एजेंसियों को आशंका है कि फरार चल रहा बिल्डर विदेश भागने की फिराक में है. पुलिस बिल्डर पर जल्द ही 25 हजार का इनाम घोषिक करने वाली है. साथ ही उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस भी जारी करने की तैयारी की जा रही है.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, आरोपित देश छोड़कर महाराजगंज बॉर्डर से होकर नेपाल भागने की कोशिश में है. नेपाल से आरोपी अन्य किसी भी देश में भाग सकता है. इस सभी पहलुओं को लेकर पुलिस अब उन्हें भागने से पहले ही हर कानूनी पहलू आजमा रही है.
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना के बाद से ही आरोपी का फोन लगातार बंद आ रहा है. पुलिस लगातार आरोपी के करीबियों और सहयोगियों से पूछताछ कर रही है. इसके साथ ही सभी की कॉल डिटेल्स भी निकलवाई गई है.
हालांकि पुलिस को आरोपी के बारे में कुछ खास जानकारी नहीं मिल पाई है. निर्मल सिंह के खिलाफ पिछले शनिवार को गैर जमानती वारंट जारी किया गया था. निर्मल सिंह की गिरफ्तारी के लिए पुलिस द्वारा लगातार दबिश दी जा रही है.
16 जनवरी की रात हुआ था एक्सीडेंट
बता दें कि ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-150 में 16-17 जनवरी की दमियानी रात को घने कोहरे के बीच युवराज मेहता गुरुग्राम से घर लौट रहे थे. इसी दौरान उनकी कार एक मोड़ पर सड़क से फिसलकर निर्माणाधीन साइट के पास एक गहरे, पानी से भरे गड्ढे में गिर गई. ये गड्ढा कई सालों से बिना बैरिकेडिंग, लाइटिंग या सुरक्षा उपायों के खुला पड़ा था. युवराज ने कार की छत पर चढ़कर फ्लैश लाइट जलाकर मदद मांगी, लेकिन देर रात तक कोई सहायता नहीं पहुंची और वे डूब गए.
वहीं, इस घटना के बाद गुस्साए परिजनों का आरोप है कि ये घटना न केवल एक हादसा, बल्कि प्रशासनिक और बिल्डरों की गंभीर लापरवाही का परिणाम है. युवराज के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर पुलिस ने एमजेड विज टाउन और लोटस ग्रीन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था.
युवराज की मौत ने उठाए प्रशासन पर सवाल
शनिवार की सुबह युवराज अपने घर के बेहद करीब थे जब घने कोहरे के कारण उनकी एसयूवी अनियंत्रित होकर गहरे गड्ढे में जा गिरी. वहां न तो कोई बैरिकेडिंग थी, न रिफ्लेक्टर और न ही कोई चेतावनी बोर्ड लगा था. हादसे के बाद युवराज अपनी जान बचाने के लिए करीब दो घंटे तक कार की छत पर खड़े होकर चिल्लाते रहे, जबकि उनके बेबस पिता और बचाव दल उन्हें देख रहे थे. सुबह 4:30 बजे उनका शव बरामद हुआ जो सीधा-सीधा प्रशासनिक और निर्माण कंपनियों की लापरवाही का मामला है. स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर समय रहते वहां सुरक्षा घेरा बनाया गया होता या जल निकासी की योजना पर काम हुआ होता तो आज एक नौजवान की जान नहीं जाती.
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