बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने अपने पद से इस्तीफा देकर सबको हैरान कर दिया है. उन्होंने यह कदम यूजीसी (UGC) के नए नियमों और प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के शिष्यों के साथ हुई कथित बदसलूकी के विरोध में उठाया है. अग्निहोत्री का कहना है कि यह नियम जनरल कैटेगरी के छात्रों के अधिकारों के खिलाफ हैं और समाज में विभाजन पैदा कर रहे हैं. उन्होंने ब्राह्मण समाज के मान-सम्मान की दुहाई देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों की चुप्पी ने उन्हें आहत किया है. इसी वजह से उन्होंने सत्ता के साथ खड़े होने के बजाय जनता और समाज के पक्ष में खड़े होने का रास्ता चुना है.
यूजीसी के नए नियमों पर मचा बवाल
यूजीसी ने उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए इक्विटी कमिटी और हेल्पलाइन जैसी व्यवस्थाएं अनिवार्य की हैं. आयोग का तर्क है कि 2020 से 2025 के बीच भेदभाव की शिकायतों में भारी बढ़ोतरी हुई है जिसे रोकना जरूरी है. लेकिन सामान्य वर्ग के छात्र इसे एकतरफा मान रहे हैं. उनका आरोप है कि नियमों से ‘झूठी शिकायत’ पर कार्रवाई का प्रावधान हटा दिया गया है जिससे निर्दोष छात्रों और शिक्षकों को फंसाए जाने का डर है. छात्रों का कहना है कि इन कमिटियों में सामान्य वर्ग का प्रतिनिधित्व न होना यह दर्शाता है कि प्रशासन पक्षपाती है जिससे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है.
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शंकराचार्य विवाद ने पकड़ा तूल
प्रयागराज माघ मेले में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच चल रहा टकराव अब और गहरा गया है. अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे में स्वामी जी के शिष्यों की चोटी खींचे जाने जैसी घटनाओं का जिक्र करते हुए इसे धार्मिक अपमान बताया है. उधर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया है कि पुलिस और प्रशासन ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया है और उनके शिविर पर हमला करने की कोशिश की गई है. उन्होंने साफ कर दिया है कि जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता वे संगम स्नान नहीं करेंगे. इस मामले ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में भी उबाल ला दिया है जहां विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है.
नेताओं की चुप्पी पर तीखा हमला
अलंकार अग्निहोत्री ने इस्तीफा देने के बाद समाज के जनप्रतिनिधियों पर जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि ब्राह्मण सांसद और विधायक किसी कॉर्पोरेट कंपनी के कर्मचारियों की तरह ऊपर से आदेश मिलने का इंतजार कर रहे हैं जबकि समाज के अधिकारों का हनन हो रहा है. उन्होंने सभी ब्राह्मण नेताओं से तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है ताकि समाज को न्याय मिल सके. अग्निहोत्री के मुताबिक प्रशासनिक सेवा में रहते हुए वे इस तरह के भेदभाव और अपमान को चुपचाप नहीं देख सकते थे. यह इस्तीफा अब प्रदेश में एक बड़ी बहस का केंद्र बन गया है क्योंकि किसी अधिकारी का इस तरह खुलकर सामने आना असामान्य है.
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