प्रयागराज माघ मेले के दौरान शुरू हुआ एक विवाद खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. बता दें कि मौनी अमावस्या पर अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्राधिकरण के बीच विवाद अभी भी जारी है. इस विवाद को लेकर अब जमकर राजनीति हो रही है. शुक्रवार को अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में एक बयान दिया था. वहीं, अब उनके बयान पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पलटवार किया है.
शंकराचार्य पर दिया गया बयान अपमानजनक- अखिलेश यादव
बता दें कि सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अविमुक्तेश्वरानंद पर दिए गए योगी आदित्यनाथ के बयान को अपमानजनक करार दिया है. उन्होंने कहा कि परम पूज्य शंकराचार्य के बारे में घोर अपमानजनक अपशब्द बोलना, शाब्दिक हिंसा है और पाप भी. ऐसा कहने वाले के साथ-साथ उनको भी पाप पड़ेगा जिन्होंने चापलूसी में मेजें थपथपाई हैं. जब बीजेपी के विधायक सदन के बाहर जाएंगे और जनता का सामना करेंगे तो जनता सड़क पर उनका सदन लगा देगी.
वहीं, अखिलेश यादव ने आगे कहा कि जो महाकुंभ की मौतों पर सच्चे आंकड़े नहीं बताते हैं और कैश मुआवजा देकर उसमें भी भ्रष्टाचार का रास्ता निकाल लेते हैं. जिन लोगों तक मुआवजा नहीं पहुंचा, उनका पैसा कहां गया, ये नहीं बताते हैं. अपने ऊपर लगे मुकदमे हटवाते हैं. वो किसी और के ‘धर्म-पद’ पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार नहीं रखते हैं.
अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने कहा, ‘अपने बयान में उन्होंने ‘कानून का शासन’ बोल दिया, जैसे ही इस बात पर उनका ध्यान जाएगा वो ‘विधि का शासन’ बोलने के लिए क्या दोबार सदन बुलाएंगे या इसके लिए एक टांग पर खड़े होकर ‘लड़खड़ाता प्रायश्चित’ करेंगे.’
उन्होंने कहा, जब इंसान नहीं, अहंकार बोलता है तो यही होता है. अहंकार संस्कार को विकार में बदल देता है. वो व्यक्ति समाज में मान-सम्मान खो देता है, जिसके बारे में ये कहावत प्रचलित हो जाती है कि ‘जब मुंह खोला, तब बुरा बोला!”हाता नहीं भाता’ का ये विस्तारित रूप है. यही सच्चाई है. जिस समाज के खिलाफ रहकर उन्होंने हमेशा अपनी नफरत की राजनीति की है, उसे धर्म के मामले में भी अपमानित -पराजित करने का ये उनका अंहकार है.
क्या था पूरा विवाद और शंकराचार्य के आरोप
यह पूरा विवाद प्रयागराज के संगम तट पर मौनी अमावस्या के दिन शुरू हुआ था जब शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद अपने 200 समर्थकों के साथ रथ पर सवार होकर स्नान के लिए निकले थे. पुलिस ने भारी भीड़ को देखते हुए उन्हें बैरियर पर रोका था, लेकिन समर्थकों ने बैरियर तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश की जिससे मेले में तीन घंटे तक अफरातफरी मची रही. इसके बाद शंकराचार्य ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ गलत व्यवहार किया गया और समर्थकों को नाजायज तरीके से गिरफ्तार किया गया. फिलहाल सरकार ने साफ कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता सिर्फ कानून का शासन और आम श्रद्धालुओं की सुरक्षा बनाए रखना है.
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