भाजपा संगठनात्मक राजनीति में कार्यकर्ता की भूमिका को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने ऐसा बयान दिया, जिसने सत्ता और सिस्टम—दोनों के कान खड़े कर दिए. कॉन्स्टीट्यूशनल क्लब में आयोजित भाजपा प्रदेश संगठनात्मक कार्यशाला में राजे ने दो टूक कहा— ‘भाजपा बिना कार्यकर्ता प्राणविहीन है. गांव से लेकर जिले तक हमारे पदाधिकारी एंबेसेडर हैं. उनके साइन से जनता के काम होने चाहिए. उनकी एक घंटी में अफसर फोन उठाए और काम करें—वरना भुगतने के लिए तैयार रहे.’
राजे का यह बयान सिर्फ संगठन को उत्साहित करने वाला नहीं, बल्कि अफसरशाही को सीधी चेतावनी माना जा रहा है. खास बात यह है कि वसुंधरा राजे ने यह बात मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मौजूदगी में ही कई और संकेत देने की कोशिश की. अवसर शाही किस तरह हावी नजर आ रही है, 2 साल बाद भी बीजेपी के ही साथ में कार्यकर्ता किस कदर अफसर के सामने जनता से जुड़े मुद्दे सुलझाने में भी बेबस हो जाते हैं.
पिछले साल अप्रैल महीने में भी वसुंधरा राजे को जब पेयजल संकट को लेकर शिकायत मिली तो उन्होंने फौरन अधिकारियों की क्लास लगा दी. इसके साथ ही वसुंधरा ने अधिकारियों को चेतावनी भी दे दी है.
वसुंधरा राजे ने अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उनके सोने की वजह से लोग रो रहे हैं. जनता पेयजल संकट से त्रस्त है. पानी केवल कागजों पर नहीं बल्कि लोगों के होठों तक पहुंचनी चाहिए. अफसर सो रहें है, लोग रो रहें हैं. मैं ऐसा नहीं होने दूंगी. इस बयान का इतना बड़ा असर हुआ था कि जल जीवन मिशन को लेकर उनके इलाके में केंद्रीय टीम भी पहुंच गई थी.
उन्होंने साफ कहा कि कार्यकर्ता की उपेक्षा किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगी. ‘कार्यकर्ता की आवाज ही प्रधानमंत्री की आवाज है, वही मुख्यमंत्री की आवाज है. उसकी आवाज जितनी बुलंद होगी, पार्टी उतनी मजबूत होगी.’
पूर्व सीएम ने भाजपा के विस्तार को कार्यकर्ताओं की तपस्या का नतीजा बताया. उन्होंने कहा कि एक समय था जब देश के हर कोने में कांग्रेस थी, लेकिन आज हर दिशा में भाजपा दिखाई देती है. ये उस कार्यकर्ता का फल है, जिसने भूख-प्यास की परवाह किए बिना कमल खिलाने का काम किया.
वसुंधरा राजे ने भारत के विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दो वर्ष पूरे होने पर बधाई भी दी. अपने संबोधन के अंत में उन्होंने शेर पढ़कर कार्यकर्ताओं के भावनात्मक पक्ष को भी छुआ—
किसी रोते हुए चेहरे से आंसू पोछ तो सही,
किसी बेसहारा की लाठी बन तो सही.
कहीं मत कर तलाश, इसी जमीं पर है ईश्वर,
किसी के जख्म पर मरहम लगा तो सही.
राजे का संदेश साफ है कि भाजपा में कार्यकर्ता केवल संगठन की कड़ी नहीं, बल्कि सत्ता का नैतिक केंद्र हैं और अब उसकी अनदेखी की कीमत चुकानी पड़ सकती है.
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