विश्वविख्यात आमेर महल की दिव्य, ऐतिहासिक और भव्य छटा ने राष्ट्रमंडल देशों से आए संसदीय प्रतिनिधियों को मंत्रमुग्ध कर दिया. 40 राष्ट्रमंडल देशों के 120 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को दो दिवसीय जयपुर प्रवास के दौरान आमेर महल का भ्रमण किया, जहां राजस्थानी स्थापत्य, संस्कृति और शिल्प कला की भव्यता ने सभी को गहराई से प्रभावित किया.
आमेर महल पहुंचने पर प्रतिनिधिमंडल का पारंपरिक राजस्थानी रीति-रिवाजों के साथ आत्मीय और भव्य स्वागत किया गया. लोक वाद्ययंत्रों की मधुर धुन, पारंपरिक आतिथ्य और रंग-बिरंगी सांस्कृतिक झलक ने विदेशी मेहमानों को राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से रूबरू कराया.
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भ्रमण के दौरान प्रशिक्षित पर्यटक गाइड ने प्रतिनिधियों को आमेर महल के गौरवशाली इतिहास, राजपूतकालीन स्थापत्य कला और सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी. प्रतिनिधिमंडल ने दीवान-ए-आम, दीवान-ए-खास, 27 कचहरी, गणेश पोल, मुगल गार्डन और मान सिंह महल सहित दुर्ग के प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन किया.
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शीश महल की अद्वितीय कारीगरी प्रतिनिधियों के आकर्षण का केंद्र रही. शीश महल से मावठा सरोवर और केसर क्यारी बाग का मनोरम दृश्य देखकर प्रतिनिधि विशेष रूप से अभिभूत नजर आए. कई प्रतिनिधियों ने आमेर महल को भारत की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक बताते हुए राजस्थान की स्थापत्य और शिल्प परंपरा की मुक्तकंठ से सराहना की.
उल्लेखनीय है कि यह संसदीय प्रतिनिधिमंडल 17 और 18 जनवरी को जयपुर प्रवास पर है. इसमें राष्ट्रमंडल देशों की विभिन्न विधायिकाओं के अध्यक्ष, सांसद और वरिष्ठ संसदीय अधिकारी शामिल हैं. जयपुर आगमन पर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत जयपुर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी द्वारा किया गया.
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जयपुर प्रवास के दौरान प्रतिनिधिमंडल शहर की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक विशेषताओं से जुड़े अन्य प्रमुख स्थलों का भी भ्रमण करेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधि राजस्थान की गौरवशाली परंपरा और विकासशील दृष्टिकोण से और अधिक परिचित हो सकेंगे.