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‘राजस्थान SIR में 7 लाख नए आवेदन, 42 लाख नाम कटे’, एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में CEO नवीन महाजन के कई बड़े खुलासे, बोले-निकाय चुनाव से संबंध नहीं

Rajasthan CEO Naveen Mahajan EXCLUSIVE: राजस्थान में मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) को लेकर मचे सियासी घमासान के बीच प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने न्यूज 24 की कंसल्टिंग एडिटर मीना शर्मा को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में पूरे मामले पर विस्तार से स्थिति स्पष्ट की है.

Rajasthan CEO Naveen Mahajan EXCLUSIVE: राजस्थान के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवीन महाजन ने न्यूज 24 को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े हर सवाल के जवाब दिए. CEO) नवीन महाजन ने बताया कि लगभग 23 साल बाद राजस्थान में हुए SIR के तहत मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी और सटीक बनाने का प्रयास किया गया है. SIR के बाद राजस्थान की वोटर लिस्ट से करीब 41,85,000 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. 7 लाख से अधिक नए मतदाताओं के आवेदन प्राप्त हुए हैं. आवेदनों की स्क्रूटनी के दौरान लगभग 80 से 85 प्रतिशत मामलों का निपटारा किया जा चुका है. राजस्थान की कुल मतदाता संख्या 5 करोड़ 46 लाख में से 7.66% मतदाताओं को ड्राफ्ट सूची से बाहर किया गया है. चुनाव आयोग ने 98.5% मतदाताओं की मैपिंग मुकम्मल कर ली है. केवल 8.25 लाख मतदाता ऐसे हैं जिनकी मैपिंग नहीं हो पाई है, जिनके लिए प्रशासन सुनवाई और नोटिस की प्रक्रिया अपना रहा है.

मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी बनाने का प्रयास

CEO नवीन महाजन ने न्यूज 24 के साथ बातचीत में कहा कि मतदाता सूची को पूरी तरह से पारदर्शी और सटीक बनाने का प्रयास किया गया है. इनमें से अधिकांश आवेदक पात्र पाए गए हैं और जो योग्य हैं, उनके नाम 14 फरवरी को जारी होने वाली फाइनल मतदाता सूची में जोड़ दिए जाएंगे. SIR को केवल नाम हटाने की प्रक्रिया के रूप में देखना गलत है. यह उतनी ही गंभीरता से नए और युवा मतदाताओं को जोड़ने की भी प्रक्रिया है. इसी उद्देश्य से स्कूलों और कॉलेजों में इलेक्टोरल लिटरेसी क्लब (ELC) बनाए गए, कैंपस एंबेसडर नियुक्त किए और युवाओं को मोबाइल के जरिए स्वयं फॉर्म भरने को प्रेरित किया.

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क्यों हटाए गए इतने बड़े पैमाने पर नाम?

CEO नवीन महाजन ने कहा कि SIR के दौरान राजस्थान में कुल 42 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हुए. नाम हटाने के पीछे कई तकनीकी और व्यवहारिक कारण थे. यह अनुमान पहले से था, क्योंकि बिहार जैसे राज्यों में भी पुराने SIR के बाद 7–8 प्रतिशत तक विसंगतियां सामने आई थीं. बड़ी संख्या में ऐसे लोग थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या बीएलओ (BLO) द्वारा घर-घर जाकर की गई जांच में कई लोग अपने पते पर मौजूद नहीं मिले और आस-पड़ोस के लोगों ने भी उनकी पुष्टि नहीं की. एक से अधिक स्थानों पर दर्ज डुप्लीकेट वोटर और इन्यूमरेशन फॉर्म पर हस्ताक्षर करने से इनकार करने वाले मतदाता शामिल थे. इन सभी मामलों में बूथ स्तर पर जांच, नोटिस और सुनवाई के बाद ही इन मतदाताओं को ड्राफ्ट सूची से बाहर रखने का निर्णय लिया गया.

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आधार को लेकर भ्रम पर CEO का जवाब

आधार को लेकर उठ रहे सवालों पर CEO नवीन महाजन ने साफ कहा कि आधार को पूरी तरह बाहर नहीं किया गया है, लेकिन केवल आधार को पूर्ण पहचान प्रमाण (Complete Identity Proof) नहीं माना गया, जहां केवल पहचान की जरूरत थी, वहां आधार स्वीकार्य रहा, लेकिन जिन मामलों में पुराने रिकॉर्ड से मैपिंग जरूरी थी, वहां आधार के साथ अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए. पाकिस्तान से सटी सीमा के कारण घुसपैठ को लेकर उठे सवालों पर नवीन महाजन ने कहा कि SIR में कोई मनमाना फैसला नहीं लिया गया. मतदाताओं का वर्गीकरण मृत, पलायन, अनुपस्थित और डुप्लीकेट श्रेणियों में किया गया और हर मामले में मेरिट के आधार पर निर्णय हुआ. मतदाता सूची का अंतिम और मुकम्मल ड्राफ्ट 14 फरवरी को जारी किया जाएगा, जिसमें सभी नए पात्र मतदाताओं को शामिल किया जाएगा.

राजनीतिक दलों की भागीदारी और पारदर्शिता

CEO नवीन महाजन ने बताया कि SIR की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है और हर स्तर पर राजनीतिक दलों के एजेंटों को साथ रखा गया है. हर बूथ पर पार्टी एजेंट मौजूद रहे. हटाए गए नामों की सूचियां सार्वजनिक की गई हैं और बूथ स्तर, पंचायत और वार्ड स्तर पर साझा की गई हैं. एसडीएम, ईआरओ और जिला कलेक्टर स्तर पर नियमित बैठकें हुईं. सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से रोज़ाना आंकड़े सार्वजनिक किए गए. किसी भी पार्टी की ओर से कोई दबाव नहीं आया और पूरी प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष रही. राजस्थान में SIR प्रक्रिया के जरिए एक अधिक शुद्ध, अद्यतन और भरोसेमंद मतदाता सूची तैयार की जा रही है, जो भविष्य के सभी चुनावों की मजबूत बुनियाद बनेगी.

भौगोलिक चुनौतियों के बावजूद राजस्थान अग्रणी

CEO ने बताया कि राजस्थान में SIR सबसे चुनौतीपूर्ण रहा. पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय इलाकों में बिखरी हुई ढाणियों तक पहुंचना बीएलओ के लिए बड़ी चुनौती थी. दक्षिणी राजस्थान में डूंगरपुर, बांसवाड़ा और प्रतापगढ़ जैसे आदिवासी क्षेत्रों में पहाड़ियों पर बसी आबादी तक पहुंचना कठिन था. जयपुर जैसे शहरों में गेटेड कम्युनिटीज और वर्किंग कपल्स के कारण बीएलओ को डेटा कलेक्शन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इन सबके बावजूद बूथ लेवल ऑफिसर्स (BLOs), जिनमें करीब 85% शिक्षक हैं, जिला प्रशासन और राजनीतिक दलों के सहयोग से राजस्थान देश के अग्रणी राज्यों में रहा. नवीन महाजन ने कहा कि यह SIR प्रक्रिया उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और संतोषजनक असाइनमेंट रही. करीब 5.5 करोड़ मतदाताओं का सत्यापन, 42 लाख अपात्र मतदाताओं की पहचान और लाखों नए युवाओं को लोकतंत्र से जोड़ना, यह एक लंबी और कठिन प्रक्रिया थी, जिसे टीम राजस्थान ने सफलतापूर्वक पूरा किया.

पंचायत और निकाय चुनाव से SIR का कोई संबंध नहीं

CEO नवीन महाजन ने स्पष्ट किया कि SIR भारत निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है और इसका राज्य निर्वाचन आयोग के स्थानीय निकाय चुनावों से सीधा संबंध नहीं है, जबकि पंचायत और नगर निकाय चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग कराता है, इसलिए SIR का पंचायत या निकाय चुनावों में देरी से कोई सीधा संबंध नहीं है. फिलहाल राज्य निर्वाचन आयोग ने 1 जनवरी 2025 की मतदाता सूची के आधार पर चुनाव कराने का निर्णय लिया है.


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