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डोकलाम पर राहुल गांधी के बयान को लेकर राजस्थान विधानसभा में भी जमकर हंगामा, सदन को करना पड़ा स्थगित

डोकलाम मुद्दे पर राहुल गांधी के बयान और पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की कथित किताब को लेकर राजस्थान विधानसभा में भारी हंगामा हुआ. भाजपा-कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक के बाद सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी.

लोकसभा में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की कथित किताब के हवाले से कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयान पर मचे सियासी घमासान का असर अब राजस्थान विधानसभा में भी दिखाई दिया. डोकलाम मुद्दे को लेकर भाजपा विधायक श्रीचंद कृपलानी के बयान के बाद सदन में करीब 10 मिनट तक जोरदार हंगामा हुआ, जिसके चलते विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी.

दरअसल, राज्यपाल के अभिभाषण पर बोलते हुए श्रीचंद कृपलानी ने शुरुआत में ही राहुल गांधी का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि लोकसभा हो या विधानसभा, सभी सदस्यों को स्पीकर की व्यवस्था का पालन करना चाहिए, लेकिन राहुल गांधी लगातार बोलते रहते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि नेता प्रतिपक्ष होने के नाते राहुल गांधी में मर्यादा और जिम्मेदारी के लक्षण होने चाहिए और राजस्थान कांग्रेस के विधायकों को भी अपने नेता को समझाना चाहिए.

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इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इस सदन के सदस्य नहीं हैं, इसलिए उनका नाम लेकर दिया गया बयान कार्यवाही से हटाया जाना चाहिए. कांग्रेस विधायकों ने भी इसका समर्थन किया और विरोध दर्ज कराया.

हालांकि, कृपलानी अपने बयान पर अड़े रहे. उन्होंने कहा कि नरवणे की जिस किताब का हवाला दिया जा रहा है, वह अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है और गलत तथ्यों के आधार पर उसे संसद में उठाया गया. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राजस्थान के नेता देश के खिलाफ नहीं बोलते, लेकिन राहुल गांधी लगातार ऐसे बयान दे रहे हैं.

कृपलानी के इन शब्दों पर कांग्रेस विधायक भड़क गए और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया. नेता प्रतिपक्ष ने आपत्तिजनक शब्दों को कार्यवाही से हटाने की मांग की. इसी बीच समाज कल्याण मंत्री अविनाश गहलोत ने भी सदन में कहा कि पूरा देश देख रहा है कि लोकसभा में किस तरह तथ्यहीन बयान दिए जा रहे हैं. उन्होंने राहुल गांधी को “डरपोक नेता” बताते हुए कहा कि इस मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट में माफी मांगनी पड़ेगी.
मंत्री के इस बयान के बाद हंगामा और तेज हो गया. सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक के चलते सदन की व्यवस्था बिगड़ गई और आखिरकार स्पीकर को विधानसभा की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी.

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