कड़ाके की ठंड से बेघर और गरीब लोगों को राहत देने के लिए राजस्थान सरकार ने शहरों में रैन बसेरे खोल रखे हैं. लेकिन पाली से आई एक तस्वीर ने इन योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है. पाली विधायक भीमराज भाटी के औचक निरीक्षण में रैन बसेरे के भीतर गरीबों की जगह कर्मचारी और उनके दोस्त शराब पार्टी करते मिले, जबकि जरूरतमंद लोग ठंड में बाहर खड़े थे.
विधायक पहुंचे तो उड़ गए होश
पाली विधायक भीमराज भाटी जब अचानक रैन बसेरे पहुंचे तो अंदर का नजारा देखकर चौंक गए. जहां ठंड से राहत पाने के लिए गरीबों को होना चाहिए था, वहां सफाई कर्मचारी और उनके साथी शराब के नशे में धुत नजर आए. विधायक को देखते ही कर्मचारियों ने शराब की बोतलें और गिलास छिपाने की कोशिश की. नशे में होने के कारण कुछ लोग पहले विधायक को पहचान तक नहीं पाए और बाद में अपनी पहचान छिपाने का प्रयास करने लगे.
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“बोतलें खुली थीं, गरीबों से पैसे मांगे जाते हैं”
न्यूज़ 24 से बातचीत में विधायक भीमराज भाटी ने बताया कि रैन बसेरे में शराब की बोतलें खुली हुई थीं. उन्होंने व्यंग्य में कहा, 'हमारे लिए भी एक पैक बना दो', जिसके बाद कर्मचारी घबरा गए और बोतलें छिपाने लगे. विधायक का आरोप है कि रैन बसेरे में रात बिताने के बदले गरीबों से पैसे भी वसूले जाते हैं और उन्हें चैन से सोने तक नहीं दिया जाता है.
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योजनाएं कागज पर, लापरवाही जमीन पर
यह घटना सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर बड़ा सवाल खड़ा करती है. जिन रैन बसेरों का उद्देश्य गरीबों को ठंड से राहत देना है, वही अगर कर्मचारियों की लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी का शिकार हो जाएं, तो जरूरतमंदों को मदद कैसे मिलेगी?
अब सबकी नजर पाली नगर परिषद प्रशासन पर है कि गरीबों के साथ खिलवाड़ करने वाले इन लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कितनी सख्त कार्रवाई की जाती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा.