राजस्थान के टोंक जिले में जमीन ने ऐसा राज उगला है, जिसने गांव से लेकर जिला मुख्यालय तक हलचल मचा दी है. कहीं खजाने की चर्चा…, तो कहीं तंत्र-मंत्र की आशंका. दरअसल, यहां पर खुदाई के दौरान एक भारी-भरकम मिट्टी की डेग यानी घड़ा मिला है, जो अब सरकारी ट्रेजरी में बंद है. सवाल सिर्फ एक कि देवरी की धरती में आखिर छुपा क्या है?
हरकत में आई पुलिस और प्रशासन
पहले आशंका हुई कि कहीं कोई अनहोनी तो नहीं, कुछ ग्रामीणों ने यहां तक कहा, ‘कहीं जमीन के नीचे लाश तो नहीं दबी?’ बस फिर क्या था पहले सरपंच को सूचना दी और सरपंच ने पुलिस को. सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आया. प्रशासन की मौजूदगी में मौके पर जेसीबी पहुंची. खुदाई शुरू हुई… एक–दो फीट… फिर पांच फीट और करीब 10 फीट गहराई पर अचानक जेसीबी का पंजा किसी ठोस चीज से टकराया. मिट्टी हटाई गई तो सामने आई एक विशाल पुरानी मिट्टी की डेग.
सोने-चांदी की अशर्फियां!
करीब 100 से 150 किलो वजन, दो फीट ऊंचाई… डेढ़ फीट चौड़ी घड़ानुमा आकार…बस फिर क्या था लोकेश्वर मानव टूट पड़े और कहने लगी कि इसमें सोने चांदी की अशर्फियां है. तो कोई यह दावा करने लगा कि इसमें सोने-चांदी जैसे चमकीला धातु है. डेग निकालते ही गांव में सनसनी फैल गई.भीड़ उमड़ पड़ी और अफवाहों का बाज़ार गर्म हो गया. ग्रामीण हुंडई जब लूटपाट की कोशिश की तो पुलिस को हल्का बल प्रयोग करके इन्हें मौके से हटना पड़ा. लेकिन तब तक इस घड़े में से कुछ चमकीले धातु जैसी वस्तुओं को लेकर कई लोग खेतों में भाग गए थे. कुछ को पकड़ कर वापस उनसे वह घड़े में रखवाया गया.
पुरातत्व विभाग करेगा खुलासा
तहसीलदार नरेश गुर्जर ने कहा, ‘ग्रामीणों की सूचना पर खुदाई करवाई गई थी. डेग मिलने के बाद उसे प्रशासन ने कब्जे में लेकर ट्रेजरी में सील किया है. डेग में क्या है, इसका खुलासा पुरातत्व विभाग की जांच के बाद ही होगा.’ ग्रामीणों में चर्चा होने लगी कि ये साधारण घड़ा नहीं है…जरूर इसमें गड़ा हुआ खजाना है, कुछ लोगों ने इसे पुराने जमाने की संपत्ति बताया…तो कुछ ने तंत्र-मंत्र से जोड़ दिया. गुलाब के फूल, चप्पल और निशान, इन सबने रहस्य को और गहरा कर दिया.
हालात इतने बिगड़े कि सैकड़ों लोग मौके पर जुट गए. स्थिति को संभालते हुए पुलिस और प्रशासन ने डेग को तुरंत कब्जे में लिया. कड़ी सुरक्षा के बीच उसे निवाई की सब-ट्रेजरी के स्ट्रॉन्ग रूम में ले जाया गया. डेग यानी घड़े को सील किया गया और वीडियोग्राफी करवाई गई. फैसला साफ था. अब ये डेग उस वक्त तक नहीं खुलेगी, जब तक पुरातत्व विभाग मौके पर नहीं आता.
टोंक के अतिरिक्त जिला कलेक्टर राम रतन सोकरिया ने कहा, ‘हमें खुदाई में एक पुरानी डेग मिली है, जिसे पूरी सुरक्षा के साथ ट्रेजरी में सील कर दिया गया है. पुरातत्व विभाग के निदेशक को पत्र लिखकर सूचना दे दी गई है. आगे की कार्रवाई पुरातत्व विभाग के दिशा-निर्देशन में होगी.’
दरअसल, जमीन में गड़े खजाने या ऐतिहासिक वस्तुओं से जुड़े मामलों में भारतीय खजाना निधि अधिनियम लागू होता है. इसी कानून के तहत पुरातत्व विभाग तय करता है कि वस्तु ऐतिहासिक है या नहीं…खजाना है या सिर्फ पुराना बर्तन और आगे उसका क्या होगा. पुलिस भी पूरे मामले को गंभीरता से ले रही है. एसपी के निर्देश पर एक विशेष टीम बनाई गई है. जांच हो रही है कि घड़ा मिलने की जगह पर गुलाब के फूल किसने बिखेरे?
चप्पल और टायरों के निशान कैसे आए? और क्या यहां किसी तरह का तंत्र-मंत्र किया गया? अब देवरी गांव से लेकर टोंक तक बस एक ही सवाल गूंज रहा है, कि क्या वाकई इस डेग में खजाना है? या फिर ये किसी पुराने दौर की साधारण लेकिन ऐतिहासिक धरोहर है? सच तब सामने आएगा जब पुराततव विभाग की टीम डेग को खोलेगी.
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