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‘मेरी पत्नी आत्महत्या कर लेगी’, मंत्री बनने के लिए विधायकों ने CM शिंदे को किया था ‘ब्लैकमेल’

Shivsena MLA Blackmailed CM: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना विधायक ने बड़ा दावा किया है। रायगढ़ से सेना विधायक भरत गोगावले ने कहा है कि कई विधायकों ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बनने के लिए एकनाथ शिंदे को ब्लैकमेल किया था। उन्होंने कहा कि कई विधायक सीएम के सामने आजीब-गरीब कारणों का हवाला देते […]

Shivsena MLA Blackmailed CM: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे गुट के शिवसेना विधायक ने बड़ा दावा किया है। रायगढ़ से सेना विधायक भरत गोगावले ने कहा है कि कई विधायकों ने महाराष्ट्र सरकार में मंत्री बनने के लिए एकनाथ शिंदे को ब्लैकमेल किया था। उन्होंने कहा कि कई विधायक सीएम के सामने आजीब-गरीब कारणों का हवाला देते हुए राज्य कैबिनेट में शामिल हो गए। रायगढ़ में एक कार्यक्रम में बुधवार को गोगावले ने कहा कि एक विधायक ने मुख्यमंत्री को 'इमोशनली ब्लैकमेल' करते हुए कहा था कि अगर उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया तो उनकी पत्नी आत्महत्या कर लेंगी। उन्होंने दावा किया कि कोंकण क्षेत्र के एक अन्य विधायक कहा था कि अगर उन्हें मंत्री पद नहीं मिला तो केंद्रीय मंत्री नारायण राणे उनकी राजनीति 'खत्म' कर देंगे। तीसरे विधायक ने कहा था कि अगर उन्हें कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया तो वे विधायक पद से इस्तीफा दे देंगे।

गोगावले बोले- ऐसे लोगों की वजह से मुख्यमंत्री बने हैं शिंदे

गोगावले ने ये भी कहा कि शिंदे 'इमोशनली ब्लैकमेल' करने वाले विधायकों की वजह से ही मुख्यमंत्री बने हैं। उन्होंने बताया कि मैं जून 2022 से मंत्री बनने के लिए वेटिंग लिस्ट में हूं। बता दें कि इसी दौरान शिवसेना के करीब 40 विधायकों ने उद्धव ठाकरे से खिलाफ विद्रोह कर एकनाथ शिंदे को अपना समर्थन दिया था। गोगावले ने दावा किया कि विधायकों के अजीब-गरीब तर्क की वजह से मुख्यमंत्री धर्मसंकट में पड़ गए थे और जब ये मुझे पता चला तो मैं खुद मंत्री बनने की रेस से हट गया। लेकिन मेरा इंतजार आज भी खत्म नहीं हुआ है। बता दें कि गोगावले ने पहले भी दावा किया था कि उन्होंने अपने शपथ ग्रहण के लिए एक नया सूट सिलवाया था। लेकिन अन्य विधायकों के लिए अपना मंत्री पद छोड़ दिया था।

2 जुलाई को महाराष्ट्र में हुआ था कैबिनेट विस्तार

बता दें कि आखिरी बार महाराष्ट्र में 2 जुलाई को कैबिनेट विस्तार किया गया था। इस दौरान अजीत पवार के नेतृत्व में उनके समेत 9 विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था। अजीत पवार को डिप्टी सीएम बनाया गया था, जबकि अन्य आठ विधायकों ने मंत्रीपद की शपथ ली थी।


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