महाराष्ट्र के नगर निकाय चुनावों के नतीजों ने राजनीतिक समीकरणों को एकदम उलट-पुलट कर दिया है. 29 नगर निगमों की कुल 2,869 सीटों पर हुए मतदान में भाजपा ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 64.51 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ 1,425 सीटें जीत लीं. खासकर मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) में भाजपा का जलवा देखने लायक रहा, जहां 135 सीटों पर उतरकर उसने 66 प्रतिशत स्ट्राइक रेट हासिल किया और 89 सीटें कब्जा लीं. 45.39 प्रतिशत वोट शेयर के साथ भाजपा ने अपनी सहयोगी शिवसेना (शिंदे गुट) को भी पीछे छोड़ दिया, जिसने 90 में से 29 सीटें जीतीं.
शिवसेना (UBT) के खाते में सिर्फ 65 सीटें
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) ने 40.62 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ 160 सीटों पर लड़ीं और 27.37 प्रतिशत वोट शेयर लेकर 65 सीटें हासिल कीं. कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा, जो मात्र 15.89 प्रतिशत स्ट्राइक रेट पर सिमट गई. शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) को पूरे राज्य में सिर्फ 36 सीटें नसीब हुईं, जबकि अजीत पवार गुट वाली एनसीपी ने 167 सीटें जीतकर उम्मीद से बेहतर दिखी. राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) भी एक प्रतिशत से कम स्ट्राइक रेट पर कुछ ही सीटों तक सीमित रही.
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AIMIM ने किया हैरान
असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने महाराष्ट्र निकाय चुनाव में सबको उस समय चौंका दिया, जब 29.78 प्रतिशत स्ट्राइक रेट के साथ 125 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं, आम आदमी पार्टी (AAP) ने 455 सीटों पर कोशिश की, लेकिन खाता तक नहीं खुल सका. 2017 के आंकड़ों से तुलना करें तो भाजपा की प्रगति साफ दिखती है. आठ साल पहले महाराष्ट्र निकाय चुनाव में बीजेपी की 1125 सीटें थीं, जो इस बार बढ़कर 1425 पर पहुंच गई. वहीं, कांग्रेस और अविभाजित शिवसेना का ग्राफ नीचे लुढ़का, जहां पहले शिवसेना के पास 500 से ज्यादा सीटें थीं, अब दोनों मिलाकर 399 रह गईं.
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन नतीजों को सुशासन व विकास की सशक्त जीत बताया है. महाविकास अघाड़ी के घटकों के लिए यह परिणाम कई सवाल खड़े करते हैं, क्योंकि विपक्षी दलों की एकजुटता फीकी पड़ गई. पूरे महाराष्ट्र में भाजपा-नीत महायुति का दबदबा साफ झलक रहा है, जो आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा भी निर्धारित कर सकता है.