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विदेश मंत्री जयशंकर बोले- 26/11 मुंबई हमले के साजिशकर्ताओं को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए

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26/11 Mumbai Attacks: विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को 26/11 के मुंबई हमलों के पीड़ितों को याद करते हुए कहा कि आतंकवाद मानवता के लिए खतरा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों ने इस हमले की योजना बनाई और निगरानी की उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।

जयशंकर ने ट्वीट किया, “आतंकवाद मानवता के लिए खतरा है। आज 26/11 को दुनिया भारत के साथ इसके पीड़ितों को याद कर रही है। जिन लोगों ने इस हमले की साजिश रची और इसकी निगरानी की उन्हें न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए।”

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कही ये बात

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि 26/11 #MumbaiTerrorAttacks की बरसी पर देश उन सभी को कृतज्ञता के साथ याद करता है जिन्हें हमने खोया। हम उनके प्रियजनों और परिवारों के स्थायी दर्द को साझा करते हैं। राष्ट्र उन सुरक्षाकर्मियों को श्रद्धांजलि देता है, जिन्होंने कर्तव्य के पालन में बहादुरी से लड़ाई लड़ी और सर्वोच्च बलिदान दिया।

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वहीं, महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी, सीएम एकनाथ शिंदे और डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस ने शनिवार को पुलिस मेमोरियल पर माल्यार्पण किया और श्रद्धांजलि दी। NCP सांसद सुप्रिया सुले ने मुंबई अटैक की 14वीं बरसी पर तुकाराम ओंबले स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस गेटवे ऑफ इंडिया और ताज होटल के बाहर श्रद्धांजलि देने वालों में शामिल हुए।

शहीद की बेटी ने पिता को किया याद

#MumbaiTerrorAttack में जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारी विजय सालस्कर की बेटी दिव्या सालस्कर ने अपने पिता को याद करते हुए कहा कि मैं इस घटना को याद नहीं रखना चाहती और इसकी कोशिश भी करती हूं। उन्होंने कहा कि शहर के लोगों ने बहुत प्यार और सम्मान दिया है, जिससे मैं और मेरी मां हर दिन जीवित हैं।

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166 लोगों की हुई थी मौत

बता दें कि 26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकवादियों ने गोलीबारी और बमबारी हमलों को अंजाम दिया जिसमें कम से कम 166 लोग मारे गए और 300 घायल हो गए। पिछले महीने भारत ने काउंटर-टेररिज्म कमेटी (CTC) की भारत की अध्यक्षता में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की दो दिवसीय आतंकवाद विरोधी बैठक की मेजबानी की।

बैठक के बाद एक दिल्ली घोषणा जारी की गई जिसमें रेखांकित किया गया कि आतंकवादियों के सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचने का अवसर एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है और यह कि सभी सदस्य राज्यों को आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पूरी तरह से सहयोग करना चाहिए। यह भी कहा गया कि आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।

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