महाराष्ट्र की सियासत में हलचल के बीच डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने अपने रोल और फैसलों को लेकर बड़ा खुलासा किया है. News 24 से एक्सक्लूसिव बात करते हुए महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने इसके पीछे की वजह जाहिर की. एकनाथ शिंदे ने इंटरव्यू में साफ कहा कि उनका मुख्यमंत्री पद छोड़कर उपमुख्यमंत्री बनना किसी मजबूरी या सत्ता की लालसा का नतीजा नहीं है. उनके मुताबिक यह फैसला गठबंधन की मर्यादा और राज्य के विकास को ध्यान में रखकर लिया गया है. शिंदे ने कहा कि उनके लिए कुर्सी से ज्यादा जरूरी जनता की सेवा है. उन्होंने दोहराया कि बालासाहेब ठाकरे के विचारों को आगे बढ़ाना ही उनका असली मकसद है. शिंदे ने बताया कि महायुति सरकार का बड़ा लक्ष्य मुंबई छोड़कर जा चुके मराठी मानुस को फिर से शहर में बसाना है. इसके लिए क्लस्टर डेवलपमेंट और SRA जैसी योजनाओं पर तेजी से काम शुरू हो चुका है.
ठाकरे गुट के आरोपों पर जवाब
ठाकरे गुट की ओर से लगाए गए मुंबई के डेथ वारंट जैसे आरोपों पर शिंदे ने तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि जो लोग 25 साल तक मुंबई की सत्ता में रहे, वही यह बताएं कि मराठी लोग शहर छोड़ने को मजबूर क्यों हुए. शिंदे ने वसई विरार बदलापुर जैसे इलाकों का जिक्र करते हुए कहा कि यह पलायन पिछली सरकारों की नाकामी का नतीजा है. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि मुंबई हमेशा महाराष्ट्र का हिस्सा रहेगी. शिंदे के मुताबिक विपक्ष अब हताश हो चुका है, इसलिए डर फैलाने की राजनीति कर रहा है और पुराने मुद्दों को फिर से उछाल रहा है.
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मुंबई के विकास का रोडमैप
मुंबई की खराब सड़कों ट्रैफिक और प्रदूषण जैसे मुद्दों पर शिंदे ने भरोसा दिलाया कि सरकार ठोस काम कर रही है. उन्होंने कहा कि अगले डेढ़ साल में मुंबई को पूरी तरह गड्ढा मुक्त बनाया जाएगा. प्रदूषण कम करने के लिए सरकार ने 17000 करोड़ रुपये का बजट तय किया है. सड़कों की सफाई के लिए डीप क्लीन ड्राइव शुरू की गई है. कोस्टल रोड अटल सेतु और नए एलिवेटेड रोड्स से ट्रैफिक की समस्या काफी हद तक खत्म होगी. शिंदे ने दावा किया कि आने वाले समय में लोग एक छोर से दूसरे छोर तक एक घंटे में पहुंच सकेंगे.
50 करोड़ के आरोप
राज ठाकरे की ओर से विधायकों को 50 करोड़ रुपये देने के आरोपों को शिंदे ने पूरी तरह खारिज किया. उन्होंने कहा कि उनके साथ आए विधायक पैसों के लिए नहीं बल्कि शिवसेना और बालासाहेब के विचारों को बचाने के लिए आए थे. शिंदे ने याद दिलाया कि उन्होंने खुद बड़ा मंत्री पद छोड़कर संघर्ष का रास्ता चुना था. उन्होंने घर बैठकर राजनीति करने पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार जमीन पर उतरकर चलानी पड़ती है. शिंदे ने भरोसा जताया कि आने वाले समय में मुंबई का मेयर भी महायुति का ही होगा और जनता उनके काम पर फिर से मुहर लगाएगी.
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