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अस्तित्व की लड़ाई या साख का सवाल? 30 लाख उत्तर भारतीय तय करेंगे मुंबई का किंग कौन?

BMC Election: बृहन्मुंबई महानगरपालिका यानी बीएमसी के आम चुनाव के लिए मुंबई में समंदर की लहरों से ज्यादा तेज इस वक्त सियासत का पारा चढ़ रहा है. इस बार का चुनाव महज एक नगर निगम का चुनाव नहीं है, बल्कि यह अस्तित्व की लड़ाई है, साख का सवाल है और सबसे बढ़कर 'मुंबई का असली बॉस' कौन, इसका फैसला करने वाला रणक्षेत्र है. अंधेरी के एक छोटे लिट्टी चोखा होटल में लोगों से बातचीत…

Credit: Social Media

BMC Election: 30 लाख उत्तर भारतीय तय करेंगे मुंबई का किंग कौन? मुद्दा है देश की सबसे अमीर महा नगरपालिका यानी BMC चुनाव का , यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई और साख बचाने के सवाल का है 'मुंबई का असली बॉस' कौन होगा यह 16 जनवरी को तय होगा , यहां पर मुख्य मुकाबला त्रिकोणीय है एक तरफ महायुति है दूसरी तरफ ठाकरे ब्रदर्स , शरद पवार की एनसीपी और तीसरा गठबंधन कांग्रेस-VBA का है ,सभी पार्टियों का दावा है कि मुंबई का मेयर उनका होगा और मेयर मराठी व्यक्ति ही होगा लेकिन यह भी नहीं भूलना चाहिए कि मुंबई के मेयर का रास्ता उत्तरभारतीय वोटरों से होकर जाता है यहां पर 30 फीसदी उत्तरभारतीय यानि हिंदी बोलने वाले हैं ये क्या सोचते हैं किसको पसंद करते हैं इनकी समस्या क्या है

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सालाना बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक

बीएमसी का सालाना बजट 74,000 करोड़ रुपये से अधिक है, जो कई छोटे राज्यों के कुल बजट से भी बड़ा है. यही कारण है कि बीएमसी पर राज करने वाली पार्टी की पकड़ मुंबई की धड़कन और अर्थव्यवस्था पर होती है, और इसे 'मिनी विधानसभा' कहा जाता है.इस चुनाव की खासियत यह चुनाव 8 साल बाद हो रहा है,शिवसेना बंट चुकी है, ठाकरे भाइयों को साथ आना पड़ा है.

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बीएमसी में 30 लाख उत्तर भारतीय मतदाता

बीएमसी में 30 लाख उत्तर भारतीय मतदाता हैं,जो पहले बड़ी संख्या में कांग्रेस के साथ जाते थे और थोड़े शिवसेना और अन्य पार्टियों को वोट करते थे ,लेकिन 2014 के बाद से ज्यादातर उत्तरभारतीय समाज बीजेपी के साथ है,कुछ वोट शिवसेना यूबीटी को अभी भी मिलता था लेकिन राज ठाकरे की पार्टी के साथ आने से कितने उत्तर भारतीय साथ आयेंगे ये कहना मुश्किल है.

पिछली बार 2017 में कौन कितनी सीटें जीता

  • शिवसेना: 84 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
  • BJP: 82 सीटें (सिर्फ 2 सीट पीछे)
  • कांग्रेस: 31 सीटें
  • NCP: 9 सीटें
  • MNS: 7 सीटें (बाद में 6 पार्षद शिवसेना में शामिल हो गए थे)

उद्धव ठाकरे का इसी चुनाव से चमका था करियर

उद्धव ठाकरे ने 2002 में बीएमसी चुनाव के लिए शिवसेना के प्रचार प्रभारी के रूप में अपना राजनीतिक करियर शुरू किया और लगभग तीन दशकों तक बीएमसी पर अपनी पार्टी का वर्चस्व बनाए रखा. लेकिन यह चुनाव काफी अलग है इसलिए इसके चैलेंज भी अलग हैं.

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