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रेलवे का गजब कारनामा, रिटायर्ड कर्मचारियों को बांटे ‘मिलावटी चांदी’ के सिक्के; ऐसे खुली पोल

Madhya Pradesh Railways: रिटार्यड कर्मचारियों तक पहुंचा न्यूज 24अब रेलवे के रिटार्यड कर्मचारियों को ये सिक्का सम्मान मिला वो नकली चांदी के सिक्के को लेकर खुद का अपमान बता रहे हैं. कह रहे हैं कि हमारी भावनाओं को ठगने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जो जिम्मेदार अफसर हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए.

मध्य प्रदेश में रेलवे ने अजब गजब कारनामा सामने आया है. भोपाल में हमेशा की तरह रिटायर्मेंट पर हजारों कर्मचारियों को सम्मान में गोल्ड प्लेटेड चांदी के सिक्के तो दिए लेकिन वो सिक्के पूरी तरह से मिलावटी निकले. जिसे खुद रेलवे भी मान रहा है. चांदी के सिक्के थामकर रिटार्यड कर्मचारी को ठगने का काम पश्चिम मध्य रेलवे के भोपाल मंडल में हुआ है. मध्य प्रदेश में रेलवे सालों से कर्मचारियों के रिटायरमेंट के वक्त सम्मान के तौर पर गोल्ड प्लेटेड एक चांदी का सिक्का सम्मान में देता है, लेकिन 2023 से लेकर अब तक चांदी के सिक्के देकर जो सम्मान दिया गया वो अपमान के रूप में बदल गया है, जो चांदी के सिक्के दिए गए वो तांबे के निकले हैं.


रिटार्यड कर्मचारियों तक पहुंचा न्यूज 24


अब रेलवे के रिटार्यड कर्मचारियों को ये सिक्का सम्मान मिला वो नकली चांदी के सिक्के को लेकर खुद का अपमान बता रहे हैं. कह रहे हैं कि हमारी भावनाओं को ठगने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, जो जिम्मेदार अफसर हैं उन पर कार्रवाई होनी चाहिए. न्यूज 24 रेलवे से ऐसे रिटार्यड अधिकारी कर्मचारी तक पहुंचा, जिन्हें चांदी के सिक्के के नाम पर तांबे का मिलावटी सिक्का पकड़ा दिया गया.

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सम्मान के रूप में दिया जाता है सिक्का


रिटार्यड कर्मचारियों को सम्मान के रूप में 20 ग्राम का चांदी का सिक्का दिया गया . ये 2023 से लेकर 2025 तक दिए गए . लेकिन रेलवे की जांच में खुलासा हुआ कि ये चांदी के सिक्के नहीं बल्कि तांबे के हैं. इसमें 99% चांदी होनी चाहिए थी लेकिन 99% तांबा ही निकला, ऐसे 3631 सिक्के जिनकी कीमत 49 लाख रुपए हैं रिटार्यड कर्मचारियों को दे दिए गए.

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चांदी के सिक्के में निकला कॉपर


इस मामले की शिकायत रेलवे विभाग ने भोपाल के बजरिया थाने में शिकायत की है, थाना प्रभारी शिल्पा कौरव का कहना है सिंह का कहना है कि वेस्टन सेंट्रल रेलवे की तरफ से आवेदन मिला है 2023 में 2631 सिक्के इंदौर की बाईबल डायमंड कंपनी से लिए थे, फिर बाद सितंबर 2025 मे बिजलेंस कमेटी से जांच कराई तो वो कॉपर निकला, इसी को लेकर रेलवे ने आवेदन दिया कि कंपनी और सिक्कों को सर्टिफाई करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए.

कौन खरीदता है ये सिल्वर कॉइन?


वहीं, इस पूरे मामले पर पश्चिम मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हर्षद श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया रेलवे में रिटायरमेंट के दौरान रिटायर्ड कर्मचारियों को गोल्ड सिल्वर कॉइन दिए जाते हैं इन्हें ओपन टेंडर के माध्यम से खरीदा जाता है इस बार जिस फर्म ने सप्लाई किया था वह इंदौर की फर्म है. रेलवे की विजिलेंस द्वारा जांच करने पर सामने आया है कि कुछ सिक्के है जिनमें कमियां पाई गई हैं. जिन में प्रॉपर चांदी नहीं थी इसको ध्यान में रखते हुए इंदौर की जिस फर्म ने सप्लाई किए थे उसको ब्लैक लिस्ट किया गया है उसके खिलाफ भोपाल के बजरिया थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है .लगभग 3600 की क्वांटिटी में सिक्के खरीदे गए थे और कितनों में गड़बड़ी थी यह जांच कराई जा रही है.

रेलवे ने बजरिया थाने में की शिकायत


तो वही भोपाल रेल मंडल के पीआरओ नवल अग्रवाल का कहना है कि इस मामले मेंबिजलेंस की जांच में चांदी के सिक्कों में मिलावट होना पाया गया था जिसके बाद रेलवे ने बजरिया थाने में शिकायत की है. बहरहाल सवाल ये कि 2023 से ये सिक्के हजारों रिटार्यड कर्माचारियों को रेलवे ने बांट दिए लेकिन फिर डेढ़ साल बाद सितंबर 2025 में रेलवे को याद क्यो आया कि सिक्के चांदी के नहीं है, सिक्के देने से पहले उन्हें किसी से चेक क्यों नहीं किया?


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