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9 भाई-बहन, मां मजदूर पिता दिव्यांग…कौन हैं Kamleshwar Dodiyar, जिन्होंने चंदा इकट्ठा करके चुनाव लड़ा, MLA बने

Kamleshwar Dodiyar Unique Story: हम आपको उस विधायक से मिलवाते हैं, जिसने जनता से चंदा मांग कर और लोन लेकर चुनाव लड़ा और जीत गया, अब सरकार से मंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।

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Kamleshwar Dodiyar

Madhya Pradesh MLA Kamleshwar Dodiyar Unique Story: मध्य प्रदेश में हाल ही में विधानसभा चुनाव नतीजे आए हैं। भाजपा की प्रचंड जीत में जहां कांग्रेस 66 सीट पर सिमट गई। वहीं बसपा और सपा का सूपड़ा साफ हो गया, लेकिन एकमात्र विधायक ऐसा है, जो भारत आदिवासी पार्टी यानी BAP से जीतकर आए हैं। आज हम आपको उस विधायक से मिलवाते हैं, जिसने जनता से चंदा मांग कर और लोन लेकर चुनाव लड़ा और जीत गया, अब सरकार से मंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।

 

ओबामा से प्रभावित होकर चुनाव लड़ा

रतलाम जिले में आने वाली सैलाना सीट पर न तो कांग्रेस प्रत्याशी जीता और न ही भाजपा प्रत्याशी, बल्कि सैलाना विधानसभा सीट पर जीत हुई भारत आदिवासी पार्टी के प्रत्याशी कमलेश्वर डोडियार की, जो विधानसभा की औपचारिकताएं पूरी करने के लिए बहनोई की बाइक पर 400 किलोमीटर का सफर तय करके भोपाल पहुंचे। कमलेश्वर डोडियार ने बताया कि वे बेहद गरीब परिवार से आते हैं। इनके पिता के हाथ खराब हैं। मां ने मेहनत मजदूरी करके उन्हें पाला। बराक ओबामा से प्रभावित होकर कमलेश्वर ने चुनाव लड़ा।

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MLA Kamleshwar Dodiyar

मंत्री पद और मंत्रालय की इच्छा जताई

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कमलेश्वर के मुताबिक, चुनाव में धनबल का जमकर इस्तेमाल हुआ, लेकिन जनता ने उन पर भरोसा जताया। चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने चंदा इकट्ठा किया, जिससे करीब ढाई लाख रुपये मिले। इसके अलावा कुछ और खर्चे हुए, जिसके चलते उन पर फिलहाल 5 लाख रुपये का कर्जा है। कमलेश्वर के मुताबिक वे फ़िलहाल बाइक पर ही चलेंगे, लेकिन अगर उन्हें लगा कि फोर व्हीलर की ज़रूरत है तो वह भी वे ज़रूर खरीदेंगे। कमलेश्वर मंत्री भी बनना चाहते है। आदिवासी मंत्रालय में वे बेहतर काम कर सकते हैं।

MLA Kamleshwar Dodiyar

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मां और भाई मजदूर, पिता के हाथ नहीं करते काम

कमलेश्वर डोडियार ने कांग्रेस के विधायक रह चुके हर्ष विजय गहलोत को 4618 वोटों से हराया। कमलेश्यर अभी दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ कर रहे हैं। 9 भाई-बहनों में सबसे छोटे कमलेश्वर घास-फूस से बनी झोपड़ पट्टी में रहते हैं। उनकी 62 साल की मां सीता बाई मजदूर हैं। उनके पिता 70 वर्षीय ओमकार लाल डोडियार के हाथ अब काम नहीं करते। उनके 5 भाई राजस्थान में मजदूरी करते हैं। 3 बहनों की शादी हो चुकी है। जब वे लॉ करने के लिए दिल्ली गए तो उन्होंने गुजारा करने के लिए टिफिन डिलीवरी का काम किया। कमलेश्वर आदिवासियों के हकों की आवाज बनकर काम करते रहे हैं। इसके चलते उनके खिलाफ आज तक 16 FIR दर्ज हो चुकी हैं। 11 बार वे जेल भी जा चुके हैं। एक बार उन्हें 84 दिन जेल में रहना पड़ा। उन्हें कई नोटिस भी मिल चुके हैं।

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लेखक के बारे में

Khushbu Goyal

खुशबू गोयल News24 हिंदी डिजिटल में चीफ सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वेब जर्नलिज्म में 13 साल का अनुभव रखने वाली खुशबू गोयल राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. खुशबू गोयल ने अक्टूबर 2013 में अमर उजाला डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत की थी, जहां 7 साल सेवाएं देने के बाद साल नवंबर 2020 में दैनिक भास्कर डिजिटल जॉइन किया और सितंबर 2023 से News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 13 साल के करियर में खुशबू गोयल ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. खुशबू गोयल का पत्रकारिता में अनुभव: 13 साल योग्यता: कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के IMC&MT इंस्टीट्यूट से मास्टर ऑफ कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म (MJ) के बाद जर्नलिज्म में MPhil की डिग्री ली. खुशबू गोयल ने 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव की विस्तृत रिपोर्टिंग की है, जिसमें उन्हें ग्राउंड कवरेज करने का भी अनुभव है. इसके अलावा पिछले 13 साल में विभिन्न राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव को भी उन्होंने फील्ड रिपोर्टिंग के साथ कवर किया.
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