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मध्य प्रदेश के फूड प्रोसेसिंग प्रोडक्ट्स को मिलेगी इंटरनेशनल पहचान, जानें क्या है CM मोहन का प्लान?

MP Food Processing Products: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की मौजूदगी में 30 जुलाई को फूड प्रोसेसिंग प्रोडक्ट्स का बायर-सेलर मीट का आयोजन होने वाला है।

MP Food Processing Products: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव प्रदेश के विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। इसी के तहत मोहन सरकार द्वारा राज्य में 30 जुलाई मंगलवार को फूड प्रोसेसिंग प्रोडक्ट्स की बायर- सेलर मीट का आयोजन किया जाने वाला है। इस बायर-सेलर मीट का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे कन्वेंशन सेंटर में किया जाएगा। यह पूरा कार्यक्रम प्रदेश के सीएम मोहन यादव की मौजूदगी में होगा। इस कार्यक्रम में फेमस यूनिट्स के बनाए गए प्रोडक्ट और प्रोसेसिंग मशीनों का प्रदर्शन किया जाएगा।

बायर- सेलर मीट कार्यक्रम

कार्यक्रम का संचालन उद्यानिकी एसबी सिंह द्वारा किया जाएगा। उन्होंने इस कार्यक्रम के बारे में बताया कि इसका उद्देश्य उद्यानिकी विभाग में चलाए जा रहे PMFME योजना के तहत प्रदेश के माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंट्राप्राइज में बने प्रोसेसड प्रोडक्ट्स और स्पेशल हॉर्टिकल्चर प्रोडक्ट को नेशनल और इंटरनेशनल लेवल पर पहचान दिलाना है। इससे बायर और सेलर को एक शेयरिंग स्टेज मिलेगा। साथ ही किसानों को और यंग फार्मर एंटरप्रेन्योर को उद्यानिकी फसल प्रोडक्ट और प्रोसेसिंग को टेक्नोलॉजी सेक्टर में संभावनाओं को बढ़ाना है। इसके लिए सरकारी योजना के तहत वित्तीय सहायता दी जा रही है, जिसके लिए लोगों को मार्गदर्शन दिया जाएगा। यह भी पढ़ें: बाढ़ के खतरे को देखते हुए एक्शन में सीएम यादव, अफसरों को दिए कड़े निर्देश

आत्मनिर्भर भारत अभियान

एसबी सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत 'वोकल फॉर लोकल' मिशन के क्रम में आत्मनिर्भर मध्य प्रदेश के लक्ष्य को पूरा करने की कोशिश कर रही है। इस कार्यक्रम में प्रदेश मसाला, धनिया, लहसुन, संतरा, एवं टमाटर के उत्पादन में पहले स्थान है। वहीं मिर्च और प्याज के उत्पादन को दूसरे स्थान पर है। प्रदेश में उत्पादित इन उद्यानिकी फसलों को नष्ट होने से बचाने तथा मूल्य वर्धन करने के लिए उद्यानिकी विभाग में संचालित PMFME योजना अंतर्गत सूक्ष्म खाद्य प्र-संस्करण उद्यम स्थापित किये जाने के लिए इच्छुक उद्यमियों को परियोजना लागत का 35 प्रतिशत ज्यादा राशि रुपये 10 लाख तक अनुदान का प्रावधान है।


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