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MP: धार में 2 मिनट में नसबंदी! 30 की जगह 173 महिलाओं का ऑपरेशन, BMO पर गिरी गाज

madhya pradesh dhar news: मध्यप्रदेश के धार जिले से नसबंदी शिविर की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है. 2 मिनट में एक नसबंदी नियम के अनुसार प्रोटोकोल 30 महिलाओं की नसबंदी का था, लेकिन कर दी 173 महिलाओं की नसबंदी, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल. लापरवाही में BMO को हटाया, नसबंदी शिविर प्रभारी समेत 4 कर्मचारियों को शो काज नोटिस जारी.

madhya pradesh dhar news: मध्यप्रदेश में धार जिले के बाग स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आयोजित परिवार नियोजन नसबंदी शिविर में कथित भारी अव्यवस्थाओं और प्रोटोकॉल उल्लंघन की खबर ने पूरे स्वास्थ्य तंत्र को कटघरे में ला दिया है. 13 फरवरी को आयोजित शिविर में नियम के अनुसार केवल 30 महिलाओं की नसबंदी की जानी थी, लेकिन जानकारी के मुताबिक शिविर में 173 महिलाओं का ऑपरेशन कर दिया गया. बताया गया कि करीब 180 आदिवासी महिलाएं अपने छोटे-छोटे बच्चों और परिजनों के साथ शिविर में पहुंचीं थीं. इतनी बड़ी संख्या में ऑपरेशन किए जाने से व्यवस्थाएं चरमरा गईं.

ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर लिटाया

शिविर में न पीने के पानी की पर्याप्त व्यवस्था थी और न ही बैठने या आराम की समुचित सुविधा. जिन महिलाओं की नसबंदी की गई, उन्हें ऑपरेशन के बाद खुले आसमान के नीचे धूप में ही लेटा दिया गया जहां महिलाओं को दूषित पानी में ही लेटा दिया . गर्मी और दर्द से महिलाएं तड़पती रही और परेशान नजर आईं, जबकि उनके परिजन कपड़ों से हवा कर उन्हें राहत देने की कोशिश करते दिखाई दिए.

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“2 मिनट में एक नसबंदी” का था दावा

मामला तब और गंभीर हो गया जब जानकारी सामने आई कि एक निजी चिकित्सक, जो बड़वानी से बुलाए गए थे, करीब दोपहर 3 बजे केंद्र पर पहुंचे और उनके जिम्मे लगभग 180 ऑपरेशन सौंप दिए गए. बताया गया कि डॉक्टर द्वारा तेज़ी से ऑपरेशन किए जा रहे थे. अस्पताल प्रबंधन से जुड़े बसंत अजनार ने दावा किया कि डॉक्टर “2 मिनट में एक नसबंदी” कर देते हैं. इतनी तेजी से किए गए ऑपरेशनों की सुरक्षा, गुणवत्ता और मेडिकल प्रोटोकॉल को लेकर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
वही इस पूरे मामले को संज्ञान में आने के बाद मुख्य चिकित्सा स्वस्थ अधिकारी डॉक्टर अनीता सिंगारे ने कहा कि नियम के विरुद्ध कार्य हुआ है तत्काल प्रभाव से बीएमओ को जिला मुख्यालय पर अटैच किया गया है और वरिष्ठ कार्यालय को जानकारी दी गई है नियमानुसार जो भी कार्यवाही होगी वह की जाएगी.

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जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं

स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी डॉ. वीर बहादुर सिंह मुवेल शिविर के दौरान मौके पर मौजूद नहीं थे. स्टाफ द्वारा मीडिया के पहुंचने की जानकारी देने के बाद वे मौके पर पहुंचे और बैठक में होने की बात कही, जबकि उनके ही क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 180 से अधिक महिलाओं की नसबंदी की जा रही थी. स्वास्थ्य केंद्र के स्टोर-कीपर बसंत अजनार ने बताया कि 180 से अधिक मरीज शिविर में पहुंचे हैं और बिस्तरों की कमी के कारण ऑपरेशन के बाद महिलाओं को जमीन पर ही लिटाना पड़ा. उनका कहना था कि डॉक्टर विशेषज्ञ हैं और समय की कोई समस्या नहीं है, लेकिन व्यवस्थाओं की यह कमी खुद स्वास्थ्य तंत्र की तैयारियों पर बड़ा सवाल खड़ा करती है

BMO हटाए गए, 4 कर्मचारियों को नोटिस

मामला सामने आने के बाद धार की मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनीता सिंगारे ने कार्रवाई करते हुए बीएमओ वीरभद्र सिंह मुवेल को तत्काल प्रभाव से हटाकर धार जिला मुख्यालय अटैच कर दिया. साथ ही बीएमओ, शिविर प्रभारी सहित चार कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. वरिष्ठ कार्यालय को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा गया है. डॉ. अनीता सिंगारे ने स्पष्ट कहा कि प्रोटोकॉल के तहत 30 महिलाओं की ही नसबंदी की जानी थी, लेकिन 173 ऑपरेशन किए गए, जिससे शिविर में भारी अव्यवस्था फैल गई. सभी बीएमओ को निर्देश दिए गए हैं कि भविष्य में प्रोटोकॉल के अनुसार ही पंजीकरण और ऑपरेशन किए जाएं.


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