MP Assembly Election: विपिन श्रीवास्तव। मध्य प्रदेश में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होना है। लेकिन यह चुनाव बीजेपी के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होने वाला है। क्योंकि एक तरफ विपक्ष है तो दूसरी अपनों की नाराजगी भी बीजेपी के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है। चुनाव से ठीक पहले मध्य प्रदेश में बीजेपी को भी बड़ा झटका लगा है। क्योंकि सत्ताधारी पार्टी के विधायक नारायण त्रिपाठी ने नई पार्टी बनाने का ऐलान कर दिया है।
नारायण बनाएंगे नई पार्टी
सतना जिले की मैहर विधानसभा सीट से चार बार के विधायक नारायण त्रिपाठी ने बीजेपी से बगावत की पूरी तैयारी कर ली है। नारायण ने नई पार्टी बनाने का ऐलान किया है। नारायण त्रिपाठी ने अपनी पार्टी का नाम विंध्य पार्टी रखने का ऐलान किया है जो नए विंध्य प्रदेश की मांग पर बन रही है। जिसकी औपचारिकता 15 मई को पूरी कर ली जाएगी।
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विंध्य प्रदेश बनाने की भी कही बात
नारायण त्रिपाठी ने नई पार्टी बनाने के साथ-साथ विंध्य क्षेत्र के 9 जिलों की 30 विधानसभा सीटों पर जनता से जिताने की अपील भी की है, जिसके बाद अलग विंध्य प्रदेश बनाने का दावा भी किया है। जिससे प्रदेश में राजनीतिक माहौल गर्मा गया है। नारायण ने विंध्य क्षेत्र के 30 विधानसभा क्षेत्रों में अपनी कैंडिडेट उतारने की बात कही है।
नारायण त्रिपाठी ने कहा 2 मई से मैहर में बाबा बागेश्वर महाराज की कथा शुरू होगी और 7 मई तक चलेगी, इसके बाद 15 तारीख के पहले विंध्य पार्टी का रजिस्ट्रेशन हो जाएगा। विंध्य के लोग अब अपनी पार्टी के टिकट पर चुनाव लडेंगे। आपसे कहता हूं की आप मुझे 30 सीट दो आप मुझे 30 दे दो मैं दावा करता हूं कि 2024 में पृथक विंध्य प्रदेश आपके हवाले कर दूंगा। लड़ाई हम अंतिम मुकाम तक लेकर जाएंगे और विंध्य प्रदेश का पुनर्निर्माण कराएंगे।
कौन हैं नारायण त्रिपाठी
विंध्य प्रदेश की मांग उठा रहे नारायण त्रिपाठी फिलहाल तो बीजेपी से विधायक हैं, लेकिन मध्य प्रदेश की सियासत में उनकी पहचान केवल इतनी नहीं है। नारायण तीन अलग-अलग पार्टियों से विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। पहली बार 2003 में समाजवादी पार्टी के टिकट से विधायक बने थे, 2008 के चुनाव में फिर सपा की टिकट पर चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था। 2013 नारायण सपा का दामन छोड़ कांग्रेस में शामिल हुए और कांग्रेस के टिकट पर मैहर से चुनाव में उतरे और चुनाव जीत गए।
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2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस से अजय सिंह राहुल को टिकट मिला तो उन्होंने विरोध करना शुरू कर दिया, 2015 में नारायण त्रिपाठी ने कांग्रेस से त्यागपत्र दिया और 2016 के विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा से लड़कर जीत दर्ज की। वहीं 2018 के चुनाव में उन्होंने फिर भाजपा से जीत हासिल की, जब कांग्रेस सरकार अल्पमत में आई तो नारायण त्रिपाठी कांग्रेस का समर्थन करते नजर आए। लेकिन बाद में वह फिर बीजेपी के साथ आए।
नारायण त्रिपाठी तीन अलग-अलग पार्टियों से विधायक बनकर एक इतिहास बना चुके हैं। फिलहाल उनकी नई पार्टी के ऐलान से राजनीतिक हलकों में सरगर्मियां बढ़ गई हैं। बता दें कि बीजेपी विंध्य में मजबूत है और कांग्रेस यहां कमजोर। इस साल होने जा रहे विधानसभा चुनाव में बीजेपी को इससे विंध्य के इलाके में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
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