मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है. भारतीय नौसेना के साहसी 'ऑपरेशन एस्कॉर्ट' की सफलता के चलते, भारी मात्रा में रसोई गैस (LPG) लेकर दो विशाल भारतीय जहाज सुरक्षित कच्छ के मुंद्रा और अन्य बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं. इस ऑपरेशन की सफलता न केवल भारत की सुरक्षा शक्ति को दर्शाती है, बल्कि देश में रसोई गैस की संभावित किल्लत को भी समाप्त करने में मील का पत्थर साबित होगी.

इंडियन नेवी की त्रिकोणीय सुरक्षा

गल्फ ऑफ ओमान और आसपास के समुद्री इलाकों में सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए, भारतीय नौसेना ने अपने 3 अत्याधुनिक युद्धपोतों को सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी थी. इन युद्धपोतों ने एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बनाकर भारतीय LPG जहाजों को सुरक्षित भारतीय सीमा तक पहुंचाया.

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शिवालिक' और 'नंदा देवी' लेकर आए 92,700 मीट्रिक टन गैस

इस मिशन के तहत दो मुख्य जहाजों के जरिए गैस की खेप आ रही है, पहला शिवालिक: यह जहाज गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर पहुंच चुका है. इसमें लगभग 46,000 मीट्रिक टन से अधिक गैस मौजूद है.और दूसरा है नंदा देवी: यह जहाज कल गुजरात के अन्य प्रमुख बंदरगाह पर पहुंचेगा. इन दोनों जहाजों के माध्यम से कुल 92,700 मीट्रिक टन रसोई गैस भारत आ रही है, जो घरेलू बाजार में आपूर्ति को सुचारू बनाने के लिए पर्याप्त है.

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"विशाल LPG कार्गो को खाली करने के लिए कच्छ के बंदरगाहों पर युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं, ताकि जल्द से जल्द गैस को फिलिंग प्लांट तक पहुँचाया जा सके."

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LPG की किल्लत का होगा अंत

पिछले कुछ समय से मिडिल ईस्ट के तनाव के कारण गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही थी. जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी मात्रा में LPG की आवक से देश में गैस की कमी की समस्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी और त्योहारों या आने वाले सीजन में कीमतों और उपलब्धता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

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