उत्तर प्रदेश के अयोध्या में डिप्टी कमिश्नर पद से इस्तीफा देने वाले प्रशांत कुमार सिंह की कहानी में एक नया ट्विस्ट आया है. उनपर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की. ये आरोप किसी और ने नहीं बल्कि खुद उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने लगाए हैं. उनका कहना है कि प्रशांत कुमार सिंह पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनकी आंखों में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिससे उन्हें दिव्यांग माना जाए. इसके बावजूद उन्होंने खुद को 40 प्रतिशत नेत्र विकलांग बताकर सरकारी सेवा में एंट्री ली. भाई का दावा है कि ये प्रमाणपत्र पूरी तरह गलत और नियमों के खिलाफ है.
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दो बार भेजा गया था नोटिस
इस मामले की शिकायत साल 2021 में अधिकारियों से की गई थी. शिकायत के बाद प्रशांत कुमार सिंह को मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए दो बार नोटिस भेजा गया, लेकिन दोनों ही बार वो जांच के लिए नहीं पहुंचे. इससे मामले पर संदेह और गहरा हो गया. आरोपों में ये भी कहा गया है कि जिस आंख की बीमारी का हवाला दिया गया है, वो आमतौर पर ज्यादा उम्र के लोगों में होती है. इसके अलावा उनकी जन्मतिथि में गड़बड़ी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं. हाल ही में प्रशांत कुमार सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया.
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मामले की जांच जारी
उन्होंने इस्तीफे की वजह बताते हुए कहा कि वो प्रदेश और देश के शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ की गई कुछ टिप्पणियों से आहत हैं और ऐसे माहौल में काम नहीं करना चाहते. हालांकि, इस्तीफे के बाद फर्जी सर्टिफिकेट का मामला सामने आने से कई सवाल खड़े हो गए हैं. इस पूरे मामले की स्वास्थ्य विभाग और प्रशासनिक स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है. मऊ जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की देखरेख में मेडिकल दस्तावेजों की जांच की जा रही है. अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो आगे सख्त कार्रवाई हो सकती है.
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