उत्तर प्रदेश के अयोध्या में डिप्टी कमिश्नर पद से इस्तीफा देने वाले प्रशांत कुमार सिंह की कहानी में एक नया ट्विस्ट आया है. उनपर आरोप है कि उन्होंने फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की. ये आरोप किसी और ने नहीं बल्कि खुद उनके सगे बड़े भाई डॉ. विश्वजीत सिंह ने लगाए हैं. उनका कहना है कि प्रशांत कुमार सिंह पूरी तरह से स्वस्थ हैं और उनकी आंखों में ऐसी कोई समस्या नहीं है, जिससे उन्हें दिव्यांग माना जाए. इसके बावजूद उन्होंने खुद को 40 प्रतिशत नेत्र विकलांग बताकर सरकारी सेवा में एंट्री ली. भाई का दावा है कि ये प्रमाणपत्र पूरी तरह गलत और नियमों के खिलाफ है.
खबर अपडेट की जा रही है...
---विज्ञापन---
---विज्ञापन---