दिल्ली और उसके आसपास के शहरों में हवा की क्वालिटी में आए सुधार को देखते हुए प्रशासन ने ग्रैप-3 की पाबंदियों को हटाने का बड़ा फैसला लिया है. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने पिछले कुछ दिनों के डेटा की जांच करने के बाद पाया कि एक्यूआई अब पहले से बेहतर स्थिति में है. इस फैसले के बाद दिल्ली-एनसीआर में उन सभी निर्माण कार्यों को फिर से शुरू करने की इजाजत मिल गई है जो पिछले काफी समय से बंद पड़े थे. ईंट भट्ठों और स्टोन क्रशर जैसी गतिविधियों को भी बड़ी राहत मिली है जिससे हजारों मजदूरों और व्यापारियों के काम फिर से पटरी पर लौट सकेंगे.
क्या है ग्रैप-2 और यह क्यों रहेगा लागू?
भले ही ग्रैप-3 की सख्त पाबंदियां हट गई हों लेकिन ग्रैप-2 के नियम अब भी पूरी तरह प्रभावी रहेंगे. इसे तब लागू किया जाता है जब वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई 301 से 400 के बीच होता है जिसे ‘बहुत खराब’ श्रेणी माना जाता है. ग्रैप-2 का मुख्य मकसद प्रदूषण को और ज्यादा बढ़ने से रोकना है ताकि स्थिति गंभीर न हो जाए. इसके तहत सड़कों की वैक्यूम क्लीनिंग और पानी का छिड़काव बढ़ा दिया जाता है ताकि धूल के कण हवा में न घुलें. होटल और रेस्टोरेंट में कोयले या लकड़ी के इस्तेमाल पर अब भी कड़ा पहरा रहेगा ताकि धुआं कम किया जा सके.
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जनरेटर और वाहनों पर पाबंदियां
ग्रैप-2 लागू रहने की वजह से डीजल जनरेटर सेट के इस्तेमाल पर अभी भी रोक रहेगी और केवल अस्पताल या रेलवे जैसी जरूरी सेवाओं को ही इसमें छूट दी जाएगी. बीएस-3 पेट्रोल और बीएस-4 डीजल गाड़ियों के प्रवेश पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि सड़कों पर कम से कम धुआं निकले. इसके साथ ही पार्किंग फीस में बढ़ोतरी जैसे कदम भी उठाए जा रहे हैं ताकि लोग निजी गाड़ियों के बजाय मेट्रो और बसों का ज्यादा इस्तेमाल करें. सरकार का जोर अब कारपूलिंग और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर है ताकि प्रदूषण को दोबारा खतरनाक स्तर पर जाने से समय रहते रोका जा सके.
सावधानी और प्रशासन की अगली तैयारी
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पाबंदियों में ढील का मतलब यह नहीं है कि प्रदूषण का खतरा पूरी तरह टल गया है. सड़कों पर धूल उड़ाने वाली गतिविधियों और कचरा जलाने वालों के खिलाफ अभियान अब भी जारी रहेगा. वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की टीम लगातार हवा के स्तर पर नजर रख रही है और अगर दोबारा प्रदूषण बढ़ता है तो नियमों को फिर से सख्त किया जा सकता है. लोगों से अपील की गई है कि वे भी जागरूक बनें और पर्यावरण को साफ रखने में सहयोग दें. फिलहाल इस राहत से ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन सेक्टर से जुड़े लोगों ने बड़ी राहत की सांस ली है क्योंकि उनका रुका हुआ कारोबार अब फिर से शुरू हो गया है.
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