अरविंद केजरीवाल जब राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने दावा किया था कि विधानसभा परिसर में एक 'फांसी घर' बनाया गया है. ये फांसी घर भारत के महान शहीद स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरू के त्याग पर समर्पित है. इस फांसी घर को केजरीवाल सरकार ने काफी प्रचारित किया और सजाया संवारा. हालांकि अब दिल्ली विधानसभा की समिति ने ऐतिहासिक फैक्ट्स की जांच कर बताया कि विधानसभा परिसर में ऐसा कोई भी स्ट्रक्चर नहीं है.
ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड नहीं
रिपोर्ट के मुताबिक, जिस कमरे को पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की याद में बने ब्रिटिशकालीन फांसी घर के रूप में प्रचारित किया था, वह दावा ऐतिहासिक तथ्यों से साबित नहीं होता. समिति ने कहा कि जांच के दौरान ऐसा कोई आधिकारिक रिकॉर्ड, नक्शा या ठोस दस्तावेज नहीं मिला, जिससे यह प्रमाणित हो सके कि दिल्ली विधानसभा भवन में कभी फांसी देने की कोई व्यवस्था या स्ट्रक्चर मौजूद था.
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इमारत में दशकों से बंद रहस्यमयी कमरा
समिति की रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि जिसे 'फांसी घर' बताया गया, वह वास्तव में किसी अन्य उपयोग जैसे सेवा कक्ष या टिफिन रूम के रूप में इस्तेमाल होने वाली सामान्य जगह थी, जिसे बिना ऐतिहासिक प्रमाण के शहीदों की फांसी स्थल के रूप में पेश कर दिया गया. विवाद तब शुरू हुआ था जब केजरीवाल ने दावा किया कि विधानसभा की इमारत में दशकों से बंद एक रहस्यमयी कमरा मिला है, जिसकी बनावट और संरचना देखकर इसे अंग्रेजों के समय का फांसी घर माना जा रहा है, जहां कथित तौर पर भारतीय क्रांतिकारियों पर मुकदमे चलाने के बाद उन्हें फांसी दी जाती थी, और बाद में इस जगह को संरक्षित कर पर्यटकों के लिए भी खोला गया.