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नीट छात्रा मौत मामला: सीबीआई जांच के बीच परिजनों को मिल रही जान से मारी की धमकी

पटना के चर्चित नीट छात्रा मामले में सीबीआई जांच तो चल ही रही है. लेकिन दूसरी ओर इस मामले में अब पीड़ित के परिजनों को धमकी भी मिलने लगी है. एक सप्ताह के दौरान दूसरी बार छात्रा के परिजनों को धमकी भरा पत्र मिला है. पढ़ें पटना से अमिताभ ओझा की रिपोर्ट.

पटना के चर्चित नीट छात्रा मामले में सीबीआई जांच तो चल ही रही है. लेकिन दूसरी ओर इस मामले में अब पीड़ित के परिजनों को धमकी भी मिलने लगी है. एक सप्ताह के दौरान दूसरी बार छात्रा के परिजनों को धमकी भरा पत्र मिला है.

दूसरी ओर, छात्रा की मौत को लेकर अधिवक्ता ने एक बड़ा खुलासा किया है. जिसके अनुसार यदि छात्रा ने दवा का ओवरडोज लिया था तो उसे नींद वाली 13 इंजेक्शन क्यों लगाए गए. ये इंजेक्शन उसे 6 जनवरी से 9 जनवरी के बीच लगाए गए थे. सभी इंजेक्शन छात्रा के नाम पर प्रभात हॉस्पिटल के मेडिकल दुकान से खरीदे गए थे. यही नहीं छात्रा का प्रेग्नेंसी टेस्ट भी किया गया था.

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सीबीआई नीट छात्रा मामले में शम्भू गर्ल्स हॉस्टल से लेकर छात्रा के जहानाबाद स्थित गांव तक गई. कई सबूत इकट्ठा करने के बाद अब चित्रगुप्त नगर थाने के चार पुलिस कर्मियों से पूछताछ की गई है जो घटना के समय थाने में ड्यूटी पर तैनात थे. इसी क्रम में सोमवार को चार घंटे तक एएसआई से पूछताछ की गई थी. सीबीआई ने चित्रगुप्त नगर थाने की निलंबित थाना प्रभारी रौशनी कुमार को भी नोटिस दिया है.

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इधर सीबीआई की जांच चल रही है तो दूसरी तरफ नीट छात्रा के परिजनों को धमकी भरे खत मिल रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार, पहला पत्र शनिवार को मिला था. धमकी भरे पत्र में लिखा था- 'सब मारे जाओगे, सबकी जान जाएगी'. जिसके बाद इस पत्र की जानकारी पुलिस को दी गई थी.

हालांकि परिजनों की सुरक्षा के लिए जिला प्रशासन द्वारा सुरक्षा दी गई है. अभी तक इस मामले में कार्रवाई चल ही रही थी कि सोमवार की रात फिर से धमकी भरा पत्र घर में फेंका गया. गांव के लोगों ने देखा कि एक बाइक पर सवार दो अज्ञात लोगों ने यह फेंका और चले गए. घटना के बाद से परिजन डरे हुए हैं.

वहीं, दूसरी ओर नीट छात्रा मामले के वकील पटना हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट एस एन पाण्डेय ने एक और सनसनी खेज आरोप प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पर लगाया है.

अधिवक्ता के अनुसार, 'छात्रा को हॉस्पिटल में 6 जनवरी से 8 जनवरी के बीच नींद के इंजेक्शन cetamix 50mg और mozolam 10mg के 13 इंजेक्शन लगाए गए थे. वकील ने सवाल किया कि बच्ची की urine टेक्ससिटी की जांच 8 जनवरी को की गई थी जबकि यह 6 जनवरी को ही होनी चाहिए थी, जब बच्ची को अस्पताल में अचेतावस्था में लाया गया था. लेकिन उसका यह टेस्ट तब किया गया जब उसे नींद वाला इंजेक्शन का ओवर डोज दिया गया.

यही नहीं बच्ची का प्रेग्नेंसी टेस्ट भी क्यों किया गया इसका जवाब अस्पताल प्रशासन ने अब तक नहीं दिया है. दरअसल प्रभात हॉस्पिटल ने छात्रा को बचाने की कोशिश ही नहीं की.
वकील का दावा है कि छात्रा को हॉस्टल में ही खाने में नींद की दवा दी गई और जबरदस्ती की गई और जान न बचे इसलिए हॉस्पिटल से मिली भगत कर गलत इलाज किया गया.

बहरहाल छात्रा के परिजन और उसके वकील के इस खुलासे के बाद जांच में प्रभात मेमोरियल हॉस्पिटल पर सवाल उठते हैं. छात्रा के परिजनों ने इन बातों को सीबीआई के अधिकारियों को भी बताया है और इन बिंदु पर जांच की मांग की है.


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