पटना: बिहार में शराबबंदी पर पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने बुधवार को कहा कि ताड़ी बंद करने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि यह मेरा व्यक्तिगत विचार है ताड़ी एक नेचुरल जूस है और इसको शराब की कैटेगरी में रखना ही नहीं चाहिए। इसमें लाखों लोगों का व्यापार और रोजगार छिपा हुआ है। बड़ी संख्या में लोगों का इससे घर चलता है।
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इससे पहले मंगलवार को बिहार राज्य मंत्रिमंडल ने राज्य में शराब बंदी से प्रभावित हुए शराब और ताड़ी की बिक्री में शामिल लोगों के आर्थिक पुनर्वास के लिए एक योजना को मंजूरी दी है मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव एस सिद्धार्थ ने संवाददाताओं से कहा कि उक्त योजना के लिए 610 करोड़ रुपये के बजटीय परिव्यय को भी मंजूरी दी गई है।
यह योजना अप्रैल 2016 में राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू करने से पहले शराब बनाने या ताड़ी निकालने के काम में लगे गरीब लोगों, विशेष रूप से अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति से आने वाले लोगों को एक लाख रुपये की एकमुश्त आर्थिक सहायता प्रदान करने का प्रस्ताव करती है।
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