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बिहार चुनाव से पहले कैबिनेट बैठक में 41 प्रस्ताव पास, नीतीश सरकार ने खोला खजाना

Bihar Cabinet Meeting: बिहार चुनाव से पहले हुई कैबिनेट बैठक में नीतीश सरकार ने जनता के लिए खजाना खोल दिया। बैठक में कैबिनेट ने कुल 41 प्रस्तावों पर मुहर लगाई है।

बिहार कैबिनेट मीटिंग (X)
Bihar Cabinet Meeting: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई। इस कैबिनेट मीटिंग में बिहार सरकार के मंत्रिमंडल ने 41 प्रस्तावों पर मुहर लगाई और कई मुद्दों पर चर्चा की है। इसके साथ ही राज्य के विकास, प्रशासनिक सुधार और सामाजिक कल्याण से जुड़े कई महत्वपूर्ण फैसले भी लिए हैं। नीतीश की कैबिनेट ने स्वास्थ्य विभाग को पटना एम्स से दीघा रेल सह सड़क पुल तक की कनेक्टिविटी सुधाराने के लिए 1368.46 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके अलावा कैबिनेट ने बिहार पत्रकार सम्मान पेंशन योजना में संशोधन करते हुए पेंशन राशि को 6,000 से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति महीना कर दिया है।

पुनौरा धाम मंदिर का विकास

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई इस कैबिनेट बैठक में सीतामढ़ी के पुनौरा धाम मंदिर के एरिया में 50 एकड़ जमीन के संशोधित रूप से 165.57 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसका इस्तेमाल मंदिर के क्षेत्र में टूरिज्म के विकास में किया जाएगा। इसके साथ ही बिहार राज्य सफाई कर्मचारी आयोग के गठन और बिहार युवा आयोग के नए पदों के सृजन के प्रस्तावों को भी मंजूर किया गया है। इस सफाई कर्मचारी आयोग में एक महिला या ट्रांसजेंडर समेत कुल 5 सदस्य शामिल होंगे। वहीं, बिहार युवा आयोग में 6 नए पद सृजित किए जाएंगे। यह भी पढ़ें: बिहार में कॉम्फेड बना रहा 122 मिट्रिक टन प्रतिदिन मिल्क पाउडर, 1060 मिट्रिक टन पशु आहार बनाने क्षमता हुई विकसित

नए प्राथमिक विद्यालयों के लिए 270 करोड़ मंजूर

नीतीश की कैबिनेट ने इस बैठक में राज्य में प्राथमिक विद्यालयों के निर्माण के लिए 270 करोड़ रुपये अलॉट किए हैं। इसके साथ ही ड्यूटी पर गैरहाजिर रहने के कारण 7 डॉक्टरों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। साथ ही कैबिनेट ने अहम फैसला लेते हुए राज्य के गन्ना उद्योग विभाग की सेवा नियमावली, पशु चिकित्सा सेवा नियमावली, बिहार मोटर वाहन दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण और राज्य निर्वाचन आयोग नियुक्ति प्रस्ताव में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इसके अलावा कैबिनेट ने विधायकों, न्यायिक, प्रशासनिक अधिकारियों और उनके आश्रितों के आयुर्वेदिक मेडिसिन सिस्टम में इलाज का खर्च सरकार द्वारा वहन करने का फैसला लिया है।


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