Raghopur Seat Battle Between PK and Tejashwi Yadav: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए तारीखों का ऐलान हो चुका है. अब सभी दलों के उम्मीदवारों की सूची का इंतजार है. इस बीच राजद नेता तेजस्वी यादव, जिनकी राघोपुर से दावेदारी फाइनल मानी जा रही है, वे एक और सीट से चुनाव लड़ सकते हैं. ऐसी खबरें आ रही हैं. माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव मधुबनी जिले के फुलपरास विधानसभा क्षेत्र से भी नामांकन दाखिल कर सकते हैं. मगर यहां सवाल ये उठता है कि जब राघोपुर सीट यादव परिवार की सुरक्षित सीट है तो तेजस्वी को दो सीटों पर चुनाव क्यों लड़ना है?
यादव परिवार का गढ़ राघोपुर
राघोपुर सीट से यादव परिवार का रिश्ता काफी पुराना है. बिहार में RJD की सरकार बने या न बने, राघोपुर से लालू यादव का नाता नहीं टूटा. इस विधानसभा में उन्हें जनता से जीत तोहफे में मिलती ही थी. 1995 से 2000 विधानसभा चुनाव में राघोपुर से लालू यादव को जीत मिली थी. इसके बाद उपचुनाव में राबड़ी देवी ने यहां से जीत हासिल की थी. इसके बाद 2010 में राबड़ी देवी यहां से हार गई थी लेकिन 2020 में तेजस्वी यादव को राघोपुर सीट से जीत मिली.
प्रशांत किशोर भी ले रहे चुटकी
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर का भी इस साल बिहार चुनाव में बोलबाला है. उनकी तुलना भी NDA और महागठबंधन के बराबर की जा रही है. हालांकि, कुछ समय पहले तक खबर थी कि राघोपुर सीट से तेजस्वी के खिलाफ खुद पीके इस सीट से मैदान में उतरने वाले थे लेकिन उन्होंने चुनाव न लड़ने का निर्णय लेकर इस चर्चा पर अंकुश लगा दिया.
अब उनसे तेजस्वी के दो सीटों पर चुनाव लड़ने पर सवाल किया गया तो वो बोले कि अच्छे-अच्छे का पसीना निकल जाएगा क्योंकि आपने जो किया है वो भुगतना ही पड़ेगा. राघोपुर, जिसे गढ़ माना जाता है वहां की जनता भी जानती है कि उन्होंने वहां कितना काम किया है. हालांकि, इस सीट पर किसकी जीत होगी यह 14 नवंबर को साफ हो जाएगा. फिलहाल, पीके का दावा है कि जन सुराज इस सीट पर जीतेगा.
क्या राघोपुर सीट से हार जाएंगे तेजस्वी?
प्रशांत किशोर का कहना है कि अगर यहां के लोगों के लिए काम किया गया होता तो तेजस्वी भी अपने लोगों पर भरोसा दिखाते. अगर वह दूसरी सीट पर चुनाव लड़ने जा रहे हैं इसका मतलब साफ है कि आपको अपनी जनता पर भरोसा नहीं है. तेजस्वी के लिए चिंता की बात इसलिए भी है क्योंकि प्रशांत किशोर भले ही चुनाव न लड़ रहे हो लेकिन इस सीट पर उनका सक्रिय रूप से प्रचार दिख रहा है. उनका दावा है कि राघोपुर की जनता बदलाव मांग रही है.
क्यों घबरा रही है RJD?
अगर इस सीट से तेजस्वी हारते हैं तो ये उनकी राजनीतिक छवि को प्रभावित करेगा. इतना ही नहीं, इस सीट पर मिली हार यादव परिवार के लिए अपने ही गढ़ में एक बड़ा झटका साबित हो सकती है. राघोपुर इलाका बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है. ऐसे में स्थानीय लोगों में यह भाव मजबूत हो रहा है कि उन्हें अब त सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित रहना पड़ रहा है. यही असंतोष अब राजद और तेजस्वी यादव के खिलाफ हो सकता है जिससे उन्हें राघोपुर सीट में हार मिल सकती है.
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