Bihar Political Crisis: बिहार में नई सरकार बनने वाली है, यहां चल रहे सियासी घमासान पर सबकी निगाहें टिकी हैं। लेकिन बिहार का यह राजनीतिक संकट केवल सीएम पद तक सीमित नहीं है। दरअसल, इसके पीछे सभी राजनीतिक पार्टियों की नजर लोकसभा चुनाव 2024 पर गड़ी है। जदयू अध्यक्ष नीतीश कुमार किसी भी रूप में बिहार की सत्ता छोड़ना नहीं चाहते। ऐसे में जब आरजेडी द्वारा उन पर तेजस्वी यादव को डिप्टी सीएम से सीएम बनाने का दबाव बना तो उन्होंने तुरंत पाला बदल लिया।
RJD होगी कमजोर, या CPI (M-L) पर सत्ता की कुंजी
जानकारी के अनुसार RJD बिहार में अकेली बड़ी पार्टी है, जिसके पास सबसे ज्यादा विधानसभा सीट हैं। बता दें बिहार में कुल 243 विधानसभा सीटें हैं। जिसमें से कुल 79 सीटों पर आरजेडी के विधायक हैं। वहीं, बिहार में आरजेडी के बाद बीजेपी के पास विधानसभा की 78 सीटें हैं। इसके बाद JD(U) के पास 45 और कांग्रेस 19 विधानसभा सीट पर काबिज है। अब बीजेपी यहां जदयू और हिन्दुस्तान आवाम मोर्चा समेत अन्य पार्टियों को किसी भी तरह अपने साथ कर लोकसभा चुनाव 2024 में किसी भी तरह ज्यादा से ज्यादा सीट लाने की कोशिश में जुटी है। बिहार के ताजा घटनाक्रम से संकेत मिले हैं की बीजेपी और जदयू साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेंगे।
बीजेपी लोकसभा में इस बार बढ़ाना चाहती है सीट
साल 2024 में वापस सरकार में आने के लिए बीजेपी बिहारसमेत हर राज्य में अपना तिक्ड़म भिड़ा रही है। बिहार में साल 2019 लोकसभा चुनावों के नतीजों पर गौर करें तो यहां बीजेपी को कुल 17 सीटों पर जीत मिली थी। वहीं, जदयू के पास 16 लोकसभा सीट हैं। इसके अलावा लोक जनशक्ति पार्टी के पास 6 सीट और काग्रेस के पास 1 और आरजेडी के पास एक भी सीट नहीं है।
विधानसभा में इनके पास भी सीटें