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बिहार के लाल ने स्कॉटलैंड में रचा इतिहास, प्रोफेसर ध्रुव को चुना गया स्कॉटिश संसदीय चुनावों के लिए ALBA पार्टी का उम्मीदवार

बिहार का चंपारण जिला, जी हां इस जिले के रहने वाले युवा देश ही नहीं विदेशों मे भी अपना परचम लहरा रहे हैं. आजादी की लड़ाई में भी चंपारण की धरती ने अपना अहम योगदान दिया था और साल 2026 में एक बार फिर से चंपारण जिला चर्चा का केंद्र बन गया है. मोतिहारी के पास छौड़ादानों के रहने वाले प्रोफेसर ध्रुव कुमार की चर्चा आज घर-घर में हो रही है. आपको बता दे कि मोतिहारी ही नहीं ध्रुव कुमार की चर्चा देश की राजधानी से लगभग 800 किलोमीटर दूर स्काटलैंड में भी हो रही है.

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बिहार का चंपारण जिला, जी हां इस जिले के रहने वाले युवा देश ही नहीं विदेशों मे भी अपना परचम लहरा रहे हैं. आजादी की लड़ाई में भी चंपारण की धरती ने अपना अहम योगदान दिया था और साल 2026 में एक बार फिर से चंपारण जिला चर्चा का केंद्र बन गया है. मोतिहारी के पास छौड़ादानों के रहने वाले प्रोफेसर ध्रुव कुमार की चर्चा आज घर-घर में हो रही है. आपको बता दें कि मोतिहारी ही नहीं ध्रुव कुमार की चर्चा देश की राजधानी से लगभग 800 किलोमीटर दूर स्कॉटलैंड में भी हो रही है.

आखिर ध्रुव कुमार की क्यों हो रही चर्चा ?

मोतिहारी की गलियों में अपना बचपन बिताने वाले प्रोफेसर ध्रुव कुमार साल 2026 में स्कॉटलैड की संसद में अपनी सीट पक्की करने के लिए तैयार हैं. ध्रव कुमार ने स्कॉटलैंड के इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया है. आपको बता दें कि हिंदूफोबिया पर ऐतिहासिक मोशन पास कराकर होलीरूड तक अपनी आवाज पहुंचाई है. बिहार के चम्पारण से निकलकर स्कॉटलैंड की राजनीति में सक्रिय प्रो. ध्रुव कुमार को ALBA Party ने 2026 के स्कॉटिश संसदीय चुनाव के लिए ग्लास्गो रीजनल लिस्ट का उम्मीदवार घोषित किया है. अपनी डिटेल्ड रिपोर्ट Hinduphobia in Scotland और राजनीतिक रणनीति के दम पर उन्होंने इस मुद्दे को एक बड़ी आवाज बना दिया है और इसी आवाज ने ध्रुव कुमार को इंटरनेशनल लेवल पर एक पहचान दी है.

बता दें कि ध्रुव कुमार साल 2024 के ब्रिटेन आम चुनाव में उन्होंने ग्लास्गो साउथ से वेस्टमिन्स्टर से चुनाव लड़ा था. स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और आर्थिक बराबरी पर केंद्रित उनके सक्रिय जनसंपर्क अभियान ने उन्हें स्कॉटलैंड के प्रो-इंडिपेंडेंस आंदोलन में एक गंभीर और सम्मानित चेहरा बनाया और वही अनुभव आज उनके होलीरूड अभियान की मजबूत नींव है.

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प्रोफेसर ध्रुव कुमार ने न्यूज 24 से जानकारी साझा करते हुए कहा कि जब वो भारत के दूसरे राज्यों में जाते थे तो उन्हें बिहारी शब्द सुनने को मिलता था, महसूस होता था कि उन्हें कोई गाली दे रहा है. ठीक उसी तरह से विदेशी धरती पर हिंदी बोलने पर महसूस होता था कि उन्होंने बिना अपराध के ही अपराध कर डाला है. जिसके बाद बिहार के लाल ध्रुव ने बिहार और हिन्दी की रिस्पेक्ट के लिए एक अभियान छेड़ दिया जिसका परिणाम यह हुआ कि स्कॉटिश संसद में पहली बार हिंदू-विरोध की निंदा करने वाला प्रस्ताव पारित कराने में सफलता मिली. प्रो. ध्रुव कुमार ने हिन्दूफोबिआ मोशन को स्कॉटिश पार्लियामेंट के अपने डिटेल्ड रिपोर्ट और राजनीतिक समझ के चलते पास कराया, जिसके कारण उनका नाम फेमस हो गया है.

आपको बता दें कि इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल करने के बाद ध्रुव कुमार ने इंटरनेशनल ट्रेड, एजुकेशन, ट्रेड यूनियन और पॉलिटिकल इकोनॉमी में भी बहुत काम किया. इसका परिणाम यह हुआ कि भारत-स्कॉटलैंड के बीच मजबूत आर्थिक सहयोग का हिस्सा बना. इनकी गिनती गंगा-क्लाइड आर्थिक कॉरिडोर प्रमुख पैरोकारों में होती है.

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ध्रुव कुमार का योगदान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं है. उन्होंने वेस्टमिन्स्टर में शिपबिल्डिंग यानी जहाज निर्माण संबंधी संसदीय समिति/जांच प्रक्रिया में भी योगदान दिया. उन्होंने स्कॉटलैंड के ऐतिहासिक जहाज-निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने, निवेश और निष्पक्ष सरकारी खरीद के जरिए रोजगार सुरक्षित करने पर जोर दिया. ग्लास्गो में ध्रुव कुमार को एक जमीनी और सक्रिय नेता के रूप में देखा जाता है.

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