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‘सम्मान और सपोर्ट नहीं मिल रहा…’, संन्यास के लिए क्यों मजबूर हो गए थे युवराज सिंह, अब छलक पड़ा दर्द 

Yuvraj Singh: भारतीय टीम के सिक्सर किंग कहे जाने वाले युवराज सिंह अपने करियर के अंतिम पड़ाव पर बहुत दुखी थे. युवी का नाम उन दिग्गज खिलाड़ियों में शुमार है, जिन्हें बीसीसीआई ने सम्मानजनक फेयरवेल नहीं दिया. टीम इंडिया को 2 वर्ल्ड कप जिताने वाले युवराज सिंह को भारतीय टीम ने ड्रॉप कर दिया था. इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की असली वजह अब सिक्सर किंग ने फैंस को बताई है.

yuvraj singh and virat kohli

Yuvraj Singh: वाइट बॉल क्रिकेट में भारतीय टीम के बड़े मैच विनर रहे युवराज सिंह को उनके करियर के अंतिम समय में मदद नहीं मिली. जिसके कारण ही उन्होंने सभी को चौंकाते हुए अचानक संन्यास का ऐलान किया था. युवी ने इस बारे में बहुत कम बात की है. अब टीम इंडिया के सिक्सर किंग जाने वाले युवी ने संन्यास के असली कारणों पर बोला है. उस समय टीम इंडिया के ड्रेसिंग रूम का हाल अब युवी ने बताया है. संन्यास पर दिया उनका बयान अब चर्चा का विषय बन गया है. 

युवराज सिंह ने संन्यास को लेकर किया बड़ा खुलासा 

कैंसर होने के बाद भी युवराज सिंह ने आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप 2011 में टीम इंडिया के लिए खेला था. उस समय उन्होंने शानदार प्रदर्शन करके टीम इंडिया को ट्रॉफी दिलाई थी. जिसके बाद भी उन्हें फेयरवेल मैच नहीं मिला.

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इस बारे में बात करते हुए सानिया मिर्जा के पॉडकास्ट में युवी ने कहा, ‘मैं अपने खेल का मजा नहीं ले रहा था. मुझे लग रहा था कि जब मुझे मजा नहीं आ रहा तो मैं क्रिकेट क्यों खेल रहा हूं? मुझे सपोर्ट नहीं मिल रहा था. मुझे इज्जत नहीं मिल रही थी और मुझे लगा, जब मेरे पास ये नहीं है तो मुझे यह करने की क्या जरूरत है? मैं किसी ऐसी चीज में क्यों उलझा हुआ हूँ जिसमें मुझे मजा नहीं आ रहा? मुझे खेलने की क्या जरूरत है? क्या साबित करने के लिए? मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकता, मेंटली या फिजिकली यह मुझे दुख दे रहा था और जिस दिन मैंने खेलना बंद किया, मैं फिर से वही बन गया.’  

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नवजोत सिंह सिद्धू को लेकर बोले युवराज सिंह  

पूर्व भारतीय क्रिकेटर नवजोत सिंह सिद्धू ने युवी को बचपन में खेलते देखा था. जिसके बाद उन्होंने कहा था कि युवा का क्रिकेटर बन पाना मुश्किल है. जिसको युवराज के पिता योगराज सिंह ने अच्छे से नहीं लिया था. जिसके बारे में बोलते हुए युवी ने कहा, ‘अब, जब मैं पीछे मुड़कर देखता हूं, तो मुझे लगता है कि उनके पास मुझे ठीक से देखने का टाइम नहीं था. वह बस मेरे पापा के साथ अच्छे से पेश आए. फिर जाहिर है, वह उस समय इंडिया के लिए खेल रहे थे, तो शायद उन्होंने ऐसा कहा होता. मैं उस समय 13-14 साल का था, बस एक स्पोर्ट को समझ रहा था. मैं इसे पर्सनली नहीं लेता, लेकिन मेरे पापा ने इसे पर्सनली लिया.'

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