T20 World Cup 2026: टीम इंडिया 2025 में अपना पहला आईसीसी वनडे वर्ल्ड कप खिताब जीतने के बाद नए कॉन्फिडेंस के साथ महिला टी-20 वर्ल्ड कप 2026 में उतरेगी. उस जीत ने टीम की काबीलियत को दिखाया, खासकर हाई-प्रेशर वाले मैचों में. सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जेमिमा रोड्रिग्स की शानदार पारी और फाइनल में शेफाली वर्मा के ऑलराउंड प्रदर्शन ने भारत की बढ़ती गहराई को सामने लाया. यंग बॉलर क्रांति गौड़ और श्री चरनी ने भी साबित किया कि वो सबसे बड़े प्लेटफॉर्म पर अच्छा प्रदर्शन कर सकती हैं, जबकि बल्लेबाजी यूनिट ने पूरे टूर्नामेंट में कंसिस्टेंसी दिखाई.
टी20 फॉर्मेट के चैलेंजेज
50 ओवर के फॉर्मेट में कामयाबी टी20 क्रिकेट में दबदबे की गारंटी नहीं देती है. छोटा फॉर्मेट अनिश्चितता ज्यादा होती है, जहां एक खराब दिन भी सबसे मजबूत टीमों को पटरी से उतार सकता है. श्रीलंका के खिलाफ भारत की हालिया 5-0 से सीरीज जीत कॉन्फिडेंस देती है, लेकिन पूरी गारंटी नहीं, क्योंकि विपक्षी टीम की क्वालिटी थोड़ी कम थी और परफॉरमेंस में कुछ साफ कमियां भी दिखीं.
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विकेट लेने की क्षमता पर फिक्र
एक बड़ी चिंता टी-20 इंटरनेशल क्रिकेट में भारत का बॉलिंग अटैक है. अनुशासित और किफायती होने के बावजूद, गेंदबाजों को रेगुलर इंटरवल पर विकेट लेने में स्ट्रगल करना पड़ा है. श्रीलंका के खिलाफ भी, भारत किसी भी मैच में विपक्षी टीम को पूरी तरह से आउट करने में नाकाम रहा. स्पिनरों ने विकेट लेने के मामले में लीड किया, लेकिन पेस अटैक में इंटेंसिटी की कमी थी, जिससे मजबूत विरोधियों के खिलाफ सवाल उठ रहे हैं.
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एक स्पेशलिस्ट लेग-स्पिनर की कमी
एक और मुद्दा एक लगातार लेग-स्पिनर की गैरमौजूदगी है. पूनम यादव के बाद से, भारत ने काफी हद तक बाएं हाथ के स्पिन पर भरोसा किया है, जिससे वेरिएशन लिमिटेड हो गया है. होनहार ऑप्शंस के छोटे मौकों ने इस असंतुलन को हल नहीं किया है.
यकीन इस कमी को पूरा कर सकता है
गेंदबाजी संतुलन और फील्डिंग एफिशिएंसी में कमियों के बावजूद, यकीन भारत का सबसे बड़ा हथियार हो सकता है. अगर टीम 2025 में दिखाया गया वही कॉन्फिडेंस बनाए रखती है और ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका जैसी टॉप टीमों के खिलाफ मजबूती से खड़ी रहती है, तो टी20 वर्ल्ड कप जीत 2026 अभी हमारी पहुंच के दायरे में है.