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Cumin Ban in Agahan: अगहन मास में जीरा का सेवन क्यों है वर्जित, जानिए भक्ति और आयुर्वेद के रहस्य

Cumin Ban in Agahan: अगहन मास को हिन्दू धर्म पवित्र माना जाता है. गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं, 'मैं मासों में मार्गशीर्ष हूं.' क्या आप जानते हैं कि इस महीने जीरा खाने पर मनाही क्यों है? आइए जानते हैं, इस इसका रहस्य क्या है, पुराण और आयुर्वेद में इस संबंध में क्या कहा गया है?

Cumin Ban in Agahan: हिन्दू धर्म में अगहन मास को बेहद पवित्र माना जाता है. गीता में श्रीकृष्ण कहते हैं कि मैं मासों में मार्गशीर्ष (अगहन) हूं. यह मास विशेष रूप से संयम, शुद्धता और भक्ति का होता है. इस समय साधना और ध्यान में मन को शांत रखना अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. ऐसे में खाने-पीने में भी विशेष सावधानी बरती जाती है. आइए जानते हैं, इस महीने में जीरा खाने के लिए क्यों मना किया जाता है?

जीरा और अगहन का संबंध

अगहन माह में जीरा खाने से परहेज करने की परंपरा कई शास्त्रों में बताई गई है. स्कंद पुराण में साफ-साफ वर्णन मिलता है कि अगहन में तीक्ष्ण, उष्ण और पित्तवर्धक पदार्थ के सेवन से दूर रहना चाहिए. जीरा सहित कुछ और गरम मसाले इन सभी गुणों से भरपूर होते हैं. यह इंद्रियों को उत्तेजित करता है और साधना में मन को विचलित कर सकता है.

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क्या कहता है आयुर्वेद?

आयुर्वेद के अनुसार, जीरा उष्ण और पित्तवर्धक है. यह पाचन में मदद करता है, लेकिन शीत ऋतु और अगहन मास में इसे खाने से शरीर में अतिरिक्त गर्मी पैदा होती है. इस गर्मी के कारण नींद और मानसिक शांति पर असर पड़ सकता है. इसलिए इस समय हल्का, सात्विक और ठंडा भोजन करना अधिक लाभकारी माना जाता है.

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शीत ऋतु में बॉडी बैलेंस

अगहन मास विंटर यानी शीत ऋतु में आता है. इस दौरान शरीर का तापमान और पाचन-अग्नि (मंदाग्नि) संतुलित रहती है. गर्म मसाले और जीरे जैसे तीखे पदार्थ इसे असंतुलित कर सकते हैं. इससे पेट में एसिडिटी, अनिद्रा और चिड़चिड़ापन बढ़ सकता है. इसलिए दही, दूध, मूंग, फल और हल्का भोजन लेना सर्वोत्तम है.

भक्ति और मन की शांति

भक्ति और साधना के लिए मन को स्थिर रखना आवश्यक है. जीरा और अन्य तीखे मसाले जैसे लहसुन, प्याज और मिर्च इंद्रियों को उत्तेजित कर देते हैं. इससे ध्यान, जप और भजन में मन लगाना कठिन हो जाता है. अगहन में शुद्ध और शांत मन रखने के लिए जीरे का त्याग करना भक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है.

विज्ञान भी बताता है इसे सही

जीरे में मौजूद क्यूमिनाल्डिहाइड शरीर को उत्तेजित करता है. ठंड के मौसम में इसका सेवन पेट की अम्लता बढ़ा सकता है और नींद में बाधा डाल सकता है. इसलिए यह केवल धार्मिक नियम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उचित माना गया है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.


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