TrendingAI summitiranDonald Trump

---विज्ञापन---

Batuk Brahman Kaun Hain: कौन हैं ‘बटुक ब्राह्मण’, जिनके अपमान पर संगम नगरी से लखनऊ तक आया उबाल, गरमाई सियासत

Batuk Brahman Kaun Hain: प्रयागराज के माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ आए बटुक ब्राह्मणों के साथ कथित पुलिस बदसलूकी ने राजनीति में हलचल मचा दी है. अब यह विवाद संगम नगरी से लखनऊ तक फैल चुका है. जानिए, कौन हैं बटुक ब्राहमण?

Batuk Brahman Kaun Hain: प्रयागराज से उठे एक विवाद ने अब लखनऊ तक राजनीति में भूचाल मचा दिया है. माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ आए बटुक ब्राह्मणों के साथ कथित पुलिस बदसलूकी ने पूरी स्थिति को संवेदनशील बना दिया है. घटना 18 जनवरी को हुई थी. मौनी अमावस्या पर शंकराचार्य अपनी पालकी में संगम स्नान के लिए निकल रहे थे. आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने उन्हें रोक दिया और स्नान की अनुमति नहीं दी. विवाद तब बढ़ा जब शंकराचार्य ने कहा कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ चल रहे बटुक ब्राह्मणों की शिखा तक खींची. हिंदू धर्म में ब्राह्मण की शिखा का अपमान बेहद गंभीर माना जाता है.

बटुक ब्राह्मण कौन होते हैं?

सरल शब्दों में बटुक ब्राह्मण वे युवा ब्राह्मण हैं जो गुरुकुल में रहकर वेद, शास्त्र और धर्म की शिक्षा लेते हैं. ये ब्रह्मचारी होते हैं और लगभग 25 वर्ष की आयु तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं. शंकराचार्य परंपरा से जुड़े बटुक अपने हाथ में दंड रखते हैं, जो आत्मसंयम और अनुशासन का प्रतीक है.

---विज्ञापन---

यह भी पढ़ें: Neem Karoli Baba: खुशी, दुख और क्रोध में न करें ये 3 काम, जिंदगी बदल देगी नीम करोली बाबा की ये सीख

---विज्ञापन---

क्या है बटुक ब्राह्मण बनने की प्रक्रिया

बटुक बनने का सफर कठिन परंपराओं से भरा होता है. इसके कुछ मुख्य संस्कार हैं:

चूड़ाकर्म – सिर मुंडवाना, सांसारिक मोह छोड़कर नए जीवन की शुरुआत.
यज्ञोपवीत – जनेऊ धारण कर धर्म और कर्तव्यों की सीख लेना.
गायत्री दीक्षा – गुरु से मंत्र ग्रहण करना.
मेखला और दंड – कमर में मूंज की करधनी और हाथ में संयम का दंड.
भिक्षाटन – अहंकार को छोड़कर समाज से भिक्षा लेना.

ब्राह्मण की शिखा छेड़ना महापाप!

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पीड़ित बटुक ब्राह्मणों से मुलाकात की और कहा कि किसी ब्राह्मण की शिखा छेड़ना महापाप है. उन्होंने आश्वासन दिया कि दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा. इस बयान के बाद विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई.

धर्म और अस्मिता का सवाल?

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समुदाय की नाराजगी किसी भी सरकार के लिए चुनौती बन सकती है. संतों का कहना है कि अगर सबसे बड़े मेले में ही बटुक ब्राह्मणों और शंकराचार्य के साथ ऐसा व्यवहार होगा, तो धर्म की रक्षा कैसे होगी. प्रशासन मामले की जांच कर रहा है, लेकिन सोशल मीडिया और धार्मिक सर्किल में यह विवाद तेजी से फैल रहा है.

यह भी पढ़ें: Surya Gochar: हिन्दू वर्ष का अंतिम सूर्य गोचर 15 मार्च को, शुरू होगा इन 5 राशियों का ‘गोल्डन टाइम’


Topics:

---विज्ञापन---