Tamil Nadu Jallikattu Game: तमिल नाडू में पोंगल के दौरान कई कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं. तमिल नाडू में पोंगल चार दिवसीय पर्व के रूप में मनाया जाता है. यहां पर भोगी पोंगल,सूर्य पोंगल, मट्टू पोंगल और कानुम पोंगल जैसे आयोजन किये जाते हैं. पोंगल के पहले दिन भोगी पोंगल पर इन्द्रदेव की पूजा होती है, पोंगल के दूसरे दिन सूर्य पूजा होती है. तीसरे दिन को मट्टू पोंगल के नाम से मनाते हैं. मट्टू पोंगल पर शिव जी के वाहन नंदी जी की पूजा की जाती है. इस दिन जल्लीकट्टू का खेल आयोजित किया जाता है. जल्लीकट्टू में हजारों लोग मिलकर सांड़ों पर काबू पाने की कोशिश करते हैं. पोंगल के चौथे दिन कानुम पोंगल होता है. इसमें विशेषकर महिलाएं भाग लेती हैं.
क्या है जल्लीकट्टू?
पोंगल पर्व के सभी आयोजन में से सबसे रोचक जल्लीकट्टू है इसमें सांडों को काबू करने की प्रतियोगिता होती है. जल्लीकट्टू को अंग्रेजी में बैल टमिंग उत्सव (Bull Taming Sport) यानी बैल को वश में करने वाला खेल कहा जाता है. इस खेल में खुली जगह पर सांड को छोड़ा जाता है. जो लोग इस प्रतियोगिता में भाग लेते हैं वो सांड को उसके कूबड़ से पकड़कर काबू करने की कोशिश करते हैं. यह प्रतियोगिता दर्शाती है कि, कौन व्यक्ति बैल की कितनी ताकत, गति और उग्रता पर काबू कर सकता है. तमिल नाडू के मदुरै में तमिल नाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने पालामेडु जल्लीकट्टू कार्यक्रम का उद्घाटन किया.
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क्यों मनाते हैं जल्लीकट्टू पर्व?
यह परंपरा मुख्य रूप से मनोरंजन के लिए मनाई जाती है लेकिन इससे ज्यादा यह देशी नस्ल के सांडों की पहचान के लिए होती है. इस परंपरा के जरिए अच्छी नस्ल के ताकतवर सांड की पहचान की जाती है. इन सांड को खेती के लिए और प्रजनन के लिए इस्तेमाल किया जाता है. यह परंपरा युवाओं को बहादुरी और साहस दिखाने का एक माध्यम भी है. इस परंपरा के दौरन पोंगल पर्व पर सांड को अच्छे से खिलाया जाता है और उन्हें सजाया जाता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.