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Skanda Sashti Vrat Today: साल 2026 का पहला स्कंद षष्ठी व्रत आज, जानें कब और कैसे करें शिव-पार्वती के पुत्र कार्तिकेय जी की पूजा?

Skanda Shashti Vrat 2026 Today: प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को शिव जी और माता पार्वती के सबसे बड़े पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है. साल 2026 में आज यानी 24 जनवरी को ये व्रत रखा जा रहा है. चलिए अब जानते हैं स्कंद षष्ठी व्रत के महत्व, भगवान कार्तिकेय की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि आदि के बारे में.

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Credit- Social Media

Skanda Shashti Vrat 2026 Today Shubh Muhurat & Puja Vidhi: आज 24 जनवरी को साल 2026 का पहला स्कंद षष्ठी व्रत है, जो कि भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय जी को समर्पित है. पंचांग के मुताबिक, प्रत्येक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को स्कंद षष्ठी का व्रत रखा जाता है. मुख्य रूप से दक्षिण भारत के लोग हर महीने ये व्रत रखते हैं. माना जाता है कि स्कंद षष्ठी का व्रत रखने और भगवान कार्तिकेय की इस शुभ दिन पूजा करने से धन-वैभव की प्राप्ति होती है. साथ ही संतान के उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद मिलता है.

चलिए जानते हैं कि आज यानी स्कंद षष्ठी के शुभ दिन किस मुहूर्त में और कैसे भगवान कार्तिकेय की पूजा करना शुभ रहेगा. साथ ही आपको स्कंद षष्ठी व्रत से जुड़े जरूरी नियमों के बारे में पता चलेगा.

आज स्कंद षष्ठी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त

  • सूर्योदय- सुबह 07:13
  • सूर्यास्त- शाम 05:54
  • ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:26 से सुबह 06:20
  • प्रातः सन्ध्या- सुबह 05:53 से सुबह 07:13
  • अभिजित मुहूर्त- दोपहर 12:12 से दोपहर 12:54
  • विजय मुहूर्त- दोपहर 02:20 से दोपहर 03:02
  • गोधूलि मुहूर्त- शाम 05:50 से शाम 06:17

ये भी पढ़ें- Aaj Ka Panchang (आज का पंचांग), 24 January 2026: गुप्त नवरात्रि के छठे दिन स्कंद षष्ठी पर करीब 1 घंटे तक रहेगा राहुकाल, जानें किस मुहूर्त-योग में करें पूजा?

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स्कंद षष्ठी व्रत की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
  • स्वच्छ लाल, पीले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें.
  • हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें.
  • घर के मंदिर में भगवान कार्तिकेय की मूर्ति या चित्र स्थापित करें.
  • भगवान कार्तिकेय की मूर्ति को दूध, दही, शक्कर, घी और शहद से स्नान कराएं. साथ ही उन्हें चंदन, हल्दी, वस्त्र, फूल, फल, मोर पंख और मिठाई अर्पित करें.
  • देसी घी का एक दीपक जलाएं और मंत्र जाप करें.
  • कंद षष्ठी कवचम् का पाठ करें.
  • आरती करके पूजा का समापन करें.
  • शाम में फिर से कार्तिकेय जी की पूजा करें.
  • चंद्र देव को जल अर्पित करने के बाद पानी पीकर व्रत खोलें.

स्कंद षष्ठी व्रत से जुड़े नियम

धार्मिक मान्यता के अनुसार, स्कंद षष्ठी का व्रत सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक रखा जाता है. सुबह की पूजा के दौरान व्रत का संकल्प लिया जाता है, जबकि शाम में भगवान कार्तिकेय की पूजा और चंद्र देव को जल अर्पित करने के बाद उपवास को खोला जाता है. व्रत के दौरान केवल फल और दूध का ही सेवन किया जाता है, अन्य चीजों को खाने से पाप लग सकता है.

स्कंद षष्ठी व्रत रखने के लाभ

  • शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है.
  • स्वास्थ्य उत्तम रहता है.
  • ज्ञान और बुद्धि का विकास होता है.
  • जीवन में समृद्धि का आगमन होता है.
  • संतान के उज्जवल भविष्य का आशीर्वाद मिलता है.
  • नवविवाहित जोड़ों को संतान सुख मिलता है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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