Birth Story Of Lord Kartikeya: भगवान ‘कार्तिकेय’ को ग्रहों का सेनापति माना जाता है, जो कि देवों के देव महादेव और माता पार्वती के सबसे बड़े पुत्र हैं. रिश्ते में कार्तिकेय जी भगवान गणेश के बड़े भाई हैं. माना जाता है कि भगवान कार्तिकेय की विशेष कृपा से रोग और दरिद्रता दूर होती है. साथ ही शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है. इसके अलावा संतान सुख पाने के लिए नवविवाहित जोड़े कार्तिकेय जी की पूजा करते हैं और स्कंद षष्ठी का व्रत रखते हैं. लेकिन क्या आपको पता है कि कार्तिकेय जी का जन्म क्यों और कैसे हुआ था? यदि नहीं, तो चलिए जानते हैं भगवान कार्तिकेय के जन्म से जुड़े रोचक तथ्यों के बारे में.
भगवान कार्तिकेय के जन्म की कथा
शिव जी के पुत्र के हाथों होना था तारकासुर का वध
बता दें कि भगवान ‘कार्तिकेय’ के जन्म को लेकर अलग-अलग कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें से एक सबसे मुख्य कथा का उल्लेख शिव पुराण में मिलता है. शिव पुराण के अनुसार, प्राचीन काल में तारकासुर नामक शक्तिशाली दैत्य ने देवों के देव महादेव की कठोर तपस्या की और उन्हें प्रसन्न करके उनसे वरदान मांगा कि उसका वध केवल उनके (शिव जी) के पुत्र के हाथों ही होगा. उस समय शिव जी माता सती के वियोग में थे क्योंकि उन्होंने आत्म त्याग कर दिया था. इसी बात का फायदा उठाते हुए तारकासुर ने स्वर्ग, पृथ्वी और पाताल यानी तीनों लोकों में उत्पात मचाना शुरू कर दिया.
शिव-पार्वती जी के विवाह की बनाई योजना
तारकासुर के अत्याचारों से बचने के लिए सभी देवताओं ने शिव जी के विवाह की योजना बनाई. देवताओं ने कामदेव को शिव जी के पास भेजा और महादेव के अंदर प्रेम की भावना जागृत करने को कहा. इससे शिव जी अपनी साधना से बाहर आए और माता पार्वती से विवाह करने के लिए सहमत हो गए.
छह चिंगारियों से उत्पन्न हुए भगवान कार्तिकेय
विवाह के पश्चात भगवान शिव ने अपनी तीसरी आंख से छह चिंगारियां उत्पन्न की, जिन्हें अग्नि देवता ने सरवण नदी के ठंडे जल में अर्पित किया. माना जाता है कि इन्हीं छह चिंगारियों से भगवान कार्तिकेय का जन्म हुआ था. इसी वजह से उनके 6 सिर भी हैं.
देवताओं ने दिया था भगवान कार्तिकेय को सेनापति का दर्जा
जैसे-जैसे भगवान कार्तिकेय बड़े होने लगे, उनकी बुद्धि का विकास होने लगा और वो शक्तिशाली बन गए. फिर एक दिन भगवान कार्तिकेय ने तारकासुर दैत्य का वध किया, जिसके बाद तीनों लोकों में खुशहाली छा गई. इस विजय के बाद सभी देवताओं ने कार्तिकेय जी को देवताओं के सेनापति का स्थान (दर्जा) दिया.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.
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