Shattila Ekadashi 2026: माघ माह की कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को षटतिला एकादशी व्रत होता है. इस षटतिला एकादशी व्रत को करने से सभी दोष से मुक्ति मिलती है. षटतिला एकादशी व्रत पर भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना का महत्व होता है. व्रत के दिन भगवान विष्णु की पूजा-अर्चना के साथ ही उनका गुणगान करना चाहिए. यह व्रत षटतिला एकादशी व्रत की कथा के पाठ के बिना अधूरा माना जाता है. षटतिला एकादशी व्रत पर आप इस व्रत कथा का पाठ अवश्य करें.
षटतिला एकादशी व्रत कथा (Shattila Ekadashi Vrat Katha)
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पौराणिक कथा के अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मणी रहती थी. वह ब्राह्मणी महिला भगवान विष्णु की भक्ति करती थी. वह सभी व्रत किया करती थी. एक बार उसके एक महीने तक व्रत रखा जिससे उसका शरीर बहुत कमजोर हो गया. इस व्रत को करने से उसका तन शुद्ध हो गया था. शुद्ध तन के बाद भगवान विष्णु ने सोचा कि, इसका मन को भी शुद्ध करें, ताकि ऐसा करने के बाद उसे विष्णु लोक में निवास करने का मौका मिले. इसके बाद विष्णु भगवान उसके पास दान मांगने के लिए गए.
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जब भगवान विष्णु दान लेने के लिए उस ब्राह्मणी के पास पहुंचे तो उसने भगवान को मिट्टी का पिंड दान में दिया. भगवान विष्णु इस दान को लेकर चले गए. कुछ समय बाद उस ब्राह्मणी की मृत्यु हुई और वह विष्णु लोक पहुंच गई. वहां रहने के लिए उस महिला को एक खाली कुटिया मिली. उसने सोचा पूरे जीवन विष्णु जी की सेवा करने से मुझे क्या मिला यह खाली कुटिया. इस बात पर भगवान विष्णु ने उसे बताया कि, तुमने जीवन में कभी भी अन्न और धन का दान नहीं किया. इसी वजह से तुम्हें यह खाली कुटिया मिली.
इसके बाद भगवान विष्णु ने ब्राह्मणी महिला के पूछने पर इसका समाधान बताया. भगवान विष्णु ने बताया जब देवकन्या तुमसे मिलने आएंगी तब उनसे षटतिला एकादशी की व्रत कथा के बारे में पूछना. षटतिला व्रत को विधिपूर्वक करना. ब्राह्मणी ने बिल्कुल ऐसा ही किया. पूरी विधि जानकर विधिपूर्वक व्रत किया. इस व्रत को करने से उसकी खाली कुटिया पूरी भर गई. षटतिला एकादशी पर तिल का दान करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है. इससे दरिद्रता दूर होती है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.