Retirement Prediction: एक निश्चित उम्र के बाद हर व्यक्ति रिटायर होता है, लेकिन कुछ लोग ये फैसला बहुत जल्दी ले लेते हैं. हालांकि, कई बार इसके पीछे वजह उम्र नहीं, बल्कि कुंडली में ग्रहों की स्थिति हो सकती है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, शनि, बृहस्पति, राहु और सूर्य ऐसे चार प्रमुख ग्रह हैं, जिन्हें रिटायरमेंट से जुड़े निर्णय लेने के लिए जिम्मेदार माना गया है. जब ये ग्रह कुंडली में करियर और नौकरी से संबंधित भावों में विराजमान होते हैं तो व्यक्ति के मन में रिटायरमेंट लेने का विचार आने लगता है. चलिए विस्तार से जानते हैं कि शनि, बृहस्पति, राहु और सूर्य ग्रह का रिटायरमेंट के फैसले से क्या कनेक्शन है.
इस कारण मन करता है रिटायर होने का
ग्रह-
ज्योतिष शास्त्र में शनि देव यानी ग्रह को सेवा और कार्य का कारक माना गया है. वहीं, बृहस्पति ज्ञान और भाग्य के स्वामी हैं, जिसकी स्थिति से करियर में बदलाव या सेवानिवृत्ति का पता लगाया जा सकता है. सूर्य की बात करें तो उसका संबंध करियर से है, जिसके कुंडली के 10वें भाव से होने पर काम की स्थिति तय होती है. इसके अलावा राहु को अचानक होने वाली घटनाओं का कारक माना गया है, जो अचानक नौकरी छोड़ने या अचानक रिटायरमेंट के फैसले के लिए जिम्मेदार हो सकता है.
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भाव-
कुंडली के 10वें भाव को करियर, 6ठें भाव को नौकरी (सेवा) और 12वें भाव को करियर के अंत का घर माना जाता है. जिन लोगों की कुंडली के 10वें, 6ठें या 12वें भाव में शनि ग्रह, बृहस्पति ग्रह, राहु ग्रह या सूर्य ग्रह विराजमान होते हैं, उनके मन में काम को छोड़ने व रिटायरमेंट लेने का भाव उत्पन्न होता है.
महादशा और अंतर्दशा-
बता दें कि शनि ग्रह, बृहस्पति ग्रह, राहु ग्रह और सूर्य ग्रह की महादशा और अंतर्दशा के दौरान भी व्यक्ति रिटायरमेंट (सेवानिवृत्ति) लेने के फैसले के बारे में विचार करता है.
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं व ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.