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Ramayan Katha: रावण के भाई विभीषण का ही नहीं कुंभकरण का भी अहम योगदान था श्रीराम की जीत में, नींद से जुड़ा है रहस्य

Ramayan Katha: क्या आपको पता है कि राम जी की जीत में रावण के भाई विभीषण का ही नहीं कुंभकरण का भी अहम योगदान था? यदि नहीं, तो चलिए जानते हैं कि कैसे कुंभकरण ने राम जी की मदद की थी.

Credit- Social Media

Ramayan Katha: ये बात तो अधिकतर लोग जानते हैं कि रावण के खुद के भाई विभीषण ने राम जी को कई ऐसी गुप्त बातें बताई थीं, जिससे युद्ध में उनका जीतना आसान हो गया था. खासकर, विभीषण ने रावण की नाभि में गुप्त अमृत होने की बात राम जी को बताई थी. लेकिन क्या आपको ये पता है कि रावण के दूसरे भाई कुंभकरण का भी श्रीराम की जीत में एक अहम योगदान था? ये बात पढ़ने में थोड़ी हैरान कर सकती है. लेकिन सच है. चलिए जानते हैं कुंभकरण ने कैसे राम जी की मदद की थी?

क्या कुंभकरण ने राम जी की मदद की थी?

कुंभकरण ने की थी कड़ी तपस्या

पौराणिक कथाओं के अनुसार, ब्रह्मदेव से मनचाहा वरदान पाने के लिए कुंभकरण ने कड़ी तपस्या की थी. एक दिन ब्रह्मदेव कुंभकरण की तपस्या से बेहद खुश हुए और उसे वरदान देने के लिए प्रकट हुए. हालांकि, ब्रह्मदेव को पहले ही पता था कि कुंभकरण वरदान में इंद्रासन यानी इंद्र देव की गद्दी मांगेगा. ऐसे में उन्होंने मां सरस्वती से सहायता मांगी.

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मां सरस्वती ने की ब्रह्मदेव की मदद

कहा जाता है कि वरदान मांगने के दौरान मां सरस्वती कुंभकरण की जीभ पर आकर विराजमान हो गई, जिस कारण उसके मुंह से इंद्रासन की जगह निंद्रासन निकल गया. जब कुंभकरण को एहसास हुआ कि उसके मुंह से निंद्रासन निकल गया है तो उसने ब्रह्मदेव से अपना वरदान वापस मांगने को कहा. लेकिन तब तक ब्रह्मदेव ने तथास्तु कह दिया था.

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ब्रह्मदेव ने कुंभकरण को एक और वरदान दिया

इसके बाद कुंभकरण ने ब्रह्मदेव से इस अवधि को कम करने का अनुरोध किया, जिसके बाद उन्होंने कुंभकरण को 6 महीने सोने और 6 महीने जागने का वरदान दिया. लेकिन इसी के साथ ब्रह्मदेव ने कुंभकरण को एक और वरदान दिया कि यदि कोई तुम्हें सोते समय बलपूर्वक जगाएगा तो उसकी उसी दिन मृत्यु हो जाएगी.

रावण ने कुंभकरण को जगाया

कहा जाता है कि जब रावण और राम जी के बीच युद्ध चल रहा था तो रावण बहुत डर गया था. उसने अपने आप को बचाने के लिए कुंभकरण को बलपूर्वक नींद से जगाया, जिस कारण रावण की उसी दिन मृत्यु होने का योग बन गया. हालांकि, अंत में हुआ भी ऐसा. राम जी के हाथों रावण का उसी दिन अंत हुआ.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.


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