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Neem Karoli Baba: भक्तों को किस रूप में दर्शन देते हैं हनुमान जी? नीम करौली बाबा ने कही ये अनमोल बात

Neem Karoli Baba: नीम करौली बाबा बताते हैं कि हनुमान जी मंदिरों तक सीमित नहीं हैं. वे साधारण मनुष्य के रूप में जीवन में सामने आते हैं. हमारी करुणा और सेवा ही सच्चे दर्शन की कुंजी है. सवाल यह है कि हम उन्हें पहचान पाते हैं या नहीं? आइए जानते हैं, हनुमान जी भक्तों को किस रूप में दर्शन देते हैं और सेवा का क्या अर्थ है?

Neem Karoli Baba: आधुनिक भारत के महान संत नीम करौली बाबा को भक्त प्रेम से महाराज जी कहते हैं. उनके हर सत्संग के उपदेश में उनका संदेश बहुत सीधा है. वे कहते थे कि ईश्वर केवल मंदिरों में खोजने की वस्तु नहीं हैं. वे हमारे रोजमर्रा के जीवन में हर कदम पर मिल सकते हैं. बस उन्हें देखने की दृष्टि चाहिए. बाबा कहते थे कि जब मन करुणा से भर जाता है, तभी सच्चे दर्शन होते हैं. आइए जानते हैं, हनुमान जी भक्तों को किस रूप में दर्शन देते हैं और सेवा का क्या अर्थ है?

हनुमान जी का बदला हुआ रूप

महाराज जी ने अपने उपदेशों में समझाया है कि कि हनुमान जी हमेशा गदा धारण किए या वानर रूप में प्रकट नहीं होते. वे दुर्वेष में आते हैं. यानी साधारण मनुष्य का रूप धारण करते हैं. कभी वे थके हुए मजदूर जैसे लगते हैं. कभी भूखे या रोग से पीड़ित व्यक्ति के रूप में सामने आते हैं. उनका उद्देश्य मनुष्य के मन की परीक्षा लेना होता है.

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दर्शन का असली अर्थ

दर्शन का मतलब केवल आंखों से देखना नहीं है. दर्शन का अर्थ है मन से पहचानना. जब कोई व्यक्ति दुखी इंसान को देखकर भी अनदेखा नहीं करता, वही सच्चा दर्शन करता है. हनुमान जी ऐसे समय में सामने आते हैं, जब हमें निर्णय लेना होता है कि हम केवल अपने बारे में सोचेंगे या सामने वाले की पीड़ा समझेंगे.

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सेवा ही सबसे बड़ी पूजा

नीम करौली बाबा बार बार कहते थे कि सेवा से बड़ी कोई साधना नहीं. भूखे को भोजन देना, प्यासे को पानी देना, दुखी को दो शब्द दिलासा देना, यही हनुमान जी की पूजा है. मंदिर की घंटी बजाना आसान है. लेकिन किसी जरूरतमंद का हाथ थामना कठिन होता है. यही कठिन कर्म सच्ची भक्ति बन जाता है.

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हर दिन होती है परीक्षा

हम रोज किसी न किसी रूप में ईश्वर की परीक्षा में होते हैं. सड़क पर मदद मांगता व्यक्ति, अस्पताल में बैठा रोगी, अकेला बुजुर्ग, ये सभी हमें कुछ सिखाने आते हैं. यदि हम हर इंसान में प्रभु का अंश देखने लगें, तो हमारा व्यवहार अपने आप बदल जाता है.

बाबा का खास उपदेश

नीम करौली बाबा कम बोलते थे, लेकिन उनका जीवन खुद संदेश था. वे दिखाते थे कि प्रेम, दया और सेवा से ही हनुमान जी प्रसन्न होते हैं. जब मन निर्मल हो जाता है, तब साधारण चेहरा भी भगवान का रूप लगने लगता है. वे अपने हर उपदेश में ये 4 बातें जरूर बोलते थे:

- किसी को छोटा या तुच्छ न समझें.
- मदद करने से पहले ज्यादा सोच विचार न करें.
- सेवा को बोझ नहीं, सौभाग्य समझें.
- यह मानें कि भगवान किसी भी रूप में सामने आ सकते हैं.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।


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