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Nandi Puja Benefits: नंदी के किस कान में कही जाती है मनोकामना, क्या ये क्या सच में होती हैं पूरी; जानें प्राचीन मान्यता

Nandi Puja Benefits: नंदी के कान में अपनी मनोकामनाओं को फुसफुसाना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की अभिव्यक्ति है। लेकिन क्या आप जानते हैं, नंदी के किस कान में कही जाती हैं मनोकामनाएं, क्या इससे जुड़ी प्राचीन मान्यताएं?

Nandi Puja Benefits: नंदी भगवान शिव के वाहन और परम भक्त हैं। उन्हें शिव का द्वारपाल और दूत भी माना जाता है। हर शिव मंदिर में नंदी का एक विशाल मूर्ति रूप देखा जा सकता है, जो शिवलिंग की ओर मुख करके विराजमान रहती है। ऐसा कहा जाता है कि नंदी सदैव भगवान शिव की रक्षा और सेवा में रहते हैं।

नंदी के कान में क्यों फुसफुसाई जाती हैं मनोकामनाएं?

भक्त अपनी मनोकामनाओं को सीधे भगवान शिव तक पहुँचाने के लिए नंदी के कान में फुसफुसाते हैं। लोक आस्था के अनुसार, नंदी भगवान शिव के प्रति इतने समर्पित हैं कि उनके कानों में कही गई हर बात सीधे शिव तक पहुँचती है। यह परंपरा किसी शास्त्र में स्पष्ट रूप से उल्लेखित नहीं है, बल्कि यह वर्षों की भक्ति और लोक परंपरा का परिणाम है।

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नंदी के किस कान में कही जाती है मनोकामना?

लोक आस्था के अनुसार, नंदी के दाहिने कान में मनोकामना फुसफुसाना शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि दाहिने कान से कही गई बात सीधे भगवान शिव तक पहुँचती है और जल्दी स्वीकार होती है। हालांकि, भक्त अक्सर दोनों कानों में अपनी इच्छा बताते हैं।

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इस अभ्यास का उद्देश्य भक्ति, विश्वास और भगवान शिव के प्रति आत्मीयता बढ़ाना है। मनोकामनाएं न केवल साधारण इच्छाएं होती हैं, बल्कि भक्तों का हृदय और भावनाओं का प्रतिबिंब भी होती हैं।

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नंदी का मुख शिवलिंग की ओर क्यों होता है?

नंदी हमेशा शिवलिंग की दिशा में मुख करके विराजमान रहते हैं। इसका अर्थ है कि वे निरंतर भगवान शिव के प्रति समर्पित हैं। नंदी का यह व्यवहार भक्तों को विश्वास दिलाता है कि उनकी मनोकामनाएं सुरक्षित रूप से शिव तक पहुँच रही हैं। यह भक्ति और श्रद्धा का प्रतीक भी माना जाता है।

नंदी की पूजा के लाभ

हिन्दू धर्म में नंदी की पूजा करने से कई लाभ माने जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे:

  • भक्त और श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
  • जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतुलन आता है।
  • भक्ति, विश्वास और मानसिक शांति बढ़ती है।

लोक परंपरा और भक्ति

नंदी के कान में मनोकामना कहने की परंपरा लोक आस्था पर आधारित है। समय के साथ यह परंपरा एक प्रकार की भक्ति का रूप ले चुकी है। भक्त यह मानते हैं कि नंदी भगवान शिव के सबसे विश्वसनीय दूत हैं और उनकी बातें कभी व्यर्थ नहीं जातीं।

नंदी की प्रतीकात्मक महत्ता

नंदी केवल वाहन या द्वारपाल नहीं हैं। वे संघर्ष और समर्पण का प्रतीक भी हैं। उनका स्थिर और शांत स्वरूप भक्तों को यह सिखाता है कि मनोकामनाओं की प्राप्ति के लिए धैर्य और भक्ति आवश्यक है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.


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