Magh Gupt Navratri 2026: आज मंगलवार, 27 जनवरी 2026 को माघ गुप्त नवरात्रि का नौवां दिन है. इस दिन नवदुर्गा की नौवीं शक्ति मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है. साथ ही दस महाविद्याओं में से मां मातंगी की विशेष उपासना का भी विधान है. गुप्त नवरात्रि का यह दिन साधना की पूर्णता और सिद्धि प्राप्ति का प्रतीक माना जाता है. आइए जानते हैं, माघ गुप्त नवरात्रि के नौवें दिन का क्या महत्व है, नवम महाविद्या मां मातंगी कौन हैं, इनकी पूजा से क्या फल मिलता है और किन मंत्रों से इनकी उपासना फलदायी है?
गुप्त नवरात्रि के नौवें दिन का महत्व
गुप्त नवरात्रि का नौवां दिन साधकों के लिए बहुत खास होता है. मान्यता है कि इस दिन की गई पूजा और साधना से आध्यात्मिक शक्ति, ज्ञान और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है. इस दिन मां सिद्धिदात्री और मां मातंगी की आराधना की जाती है. यह दिन साधना के अंतिम चरण का संकेत देता है, जब साधक अपने लक्ष्य के करीब पहुंचता है.
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आज के दिन कन्या पूजन का भी विशेष महत्व है, क्योंकि कन्याओं को देवी का ही स्वरूप माना गया है. तांत्रिक परंपरा में विश्वास है कि इस दिन मां मातंगी की पूजा करने से आकर्षण शक्ति, वाक्-सिद्धि और बाधाओं से मुक्ति मिलती है.
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मां मातंगी कौन हैं?
मां मातंगी दस महाविद्याओं में से एक हैं. वे वाणी, ज्ञान, संगीत, कला और तंत्र विद्या की देवी मानी जाती हैं. उन्हें मां सरस्वती का तांत्रिक रूप भी कहा जाता है. मां मातंगी का स्वरूप सामान्यतः श्याम या गहरे हरे रंग का बताया गया है. वे हाथ में वीणा धारण करती हैं और उनके आसपास तोते दिखाई देते हैं, जो वाणी और ज्ञान का प्रतीक हैं.
मां मातंगी की साधना के लाभ
मां मातंगी की साधना से भक्त को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं, जैसे:
- वाणी में मधुरता और प्रभाव
- ज्ञान और बुद्धि का विकास
- संगीत, कला और लेखन में निपुणता
- गृहस्थ जीवन में सुख-शांति
- तंत्र साधना में सफलता
ऐसा माना जाता है कि मां मातंगी की कृपा से साधक को अचानक ज्ञान की अनुभूति या विशेष आध्यात्मिक अनुभव भी हो सकते हैं.
मां मातंगी की साधना के मंत्र:
मां मातंगी की साधना में मंत्र-जप का विशेष महत्व है. उनकी साधना के कुछ शक्तिशाली मंत्र इस प्रकार हैं:
मूल मंत्र - ॐ ह्रीं क्लीं हूं मातंग्यै फट् स्वाहा।
वाक् सिद्धि और विद्या प्राप्ति मंत्र - ॐ ह्रीं श्रीं मातंग्यै सर्ववाक् सिद्धिं देहि स्वाहा।
मातंगी गायत्री मंत्र - ॐ शुक्रप्रियाये विद्महे, श्रीकमेश्वर्यै धीमहि, तन्नो मातंगी: प्रचोदयात्।
सरल साधना मंत्र - ॐ मातंग्यै विद्या महाशक्त्यै स्वाहा।
साधना विधि और नियम: साधना में पूर्व या उत्तर दिशा में, विशेषकर रात्रि समय बैठना श्रेष्ठ है. रुद्राक्ष या हकीक माला से जप करें. वाणी, आचरण और आहार की शुद्धता रखें और गुरु मार्गदर्शन में ही साधना करें.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.