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Kharmaas 2025: 16 दिसंबर से लगेगा खरमास, इस डेट से ही क्यों शुरू होता है यह, जानें क्या करें क्या नहीं

Kharmaas 2025: क्या आप जानते हैं, खरमास हर साल 16 दिसंबर से ही क्यों शुरू होता है और इस पूरे महीने को शुभ कार्यों के लिए वर्जित क्यों माना जाता है? आइए इसे समझते हैं और यह भी जानते हैं कि इस विशेष समय में क्या करना चाहिए और क्या करने से बचना चाहिए?

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Kharmaas 2025: भारतीय पंचांग और ज्योतिष में खरमास बेहद विशेष माना जाता है. इसे क्षय मास भी कहा जाता है, यानी ऐसा महीना जिसमें शुभ कार्यों को स्थगित किया जाता है. इस समय को आत्मचिंतन, साधना और पुण्य कर्मों का काल माना गया है. हर वर्ष यह एक निश्चित तिथि पर शुरू होता है. लेकिन आखिर यह 16 दिसंबर से ही क्यों शुरू होता है? आइए, इसे सरल भाषा में समझते है और यह भी जानते हैं कि इस अवधि में क्या किया जाता है और क्या नहीं.

16 दिसंबर से ही क्यों शुरू होता है खरमास?

खरमास हर साल 16 दिसंबर से शुरू होता है और 13 जनवरी तक चलता है. इसकी वजह है, सूर्य का धनु राशि में प्रवेश करना. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य हर 30 दिन में राशि बदलता है. जब सूर्य गुरु ग्रह की राशियों, धनु या मीन में प्रवेश करता है, तब खरमास माना जाता है, क्योंकि इस दौरान गुरु कमजोर माना जाता है. 16 दिसंबर को सूर्य हमेशा धनु राशि में प्रवेश करता है और लगभग 13 जनवरी तक यहीं रहता है. यही समय धनु खरमास कहलाता है.

साल में दो बार आता है खरमास

खरमास केवल दिसंबर–जनवरी में ही नहीं लगता, बल्कि साल में दो बार आता है. ये हैं: धनु खरमास और मीन खरमास. यह वह समय होता है जब सूर्य गुरु ग्रह की दोनों राशियों में रहते हैं.

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धनु खरमास: 16 दिसंबर से 13 जनवरी तक
मीन खरमास: 15 मार्च से 14 अप्रैल तक

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खरमास क्यों नहीं होते हैं शुभ कार्य?

खरमास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन और अन्य मांगलिक काम नहीं किए जाते. इसके पीछे ज्योतिषीय कारण स्पष्ट हैं कि जब सूर्य गुरु की राशि में होता है, तब गुरु मंद और अप्रभावी माना जाता है. गुरु शुभ कार्यों, ज्ञान, धन, संतान, विवाह और भाग्य के कारक और प्रतिनिधि है. कहते हैं इस समय गुरु का प्रभाव पृथ्वी तक पूर्ण रूप से नहीं पहुंचतीं है. इसी कारण मंगल, शुभ और नए प्रारंभों को स्थगित करने की परंपरा है.

खरमास में में जरूर करें ये काम

खरमास को अशुभ नहीं, बल्कि आध्यात्मिक उत्थान और आत्मशुद्धि का श्रेष्ठ अवसर माना गया है. इस समय आप अपने भीतर की ऊर्जा को संतुलित करने और जीवन में सकारात्मकता बढ़ाने वाले कई पुण्य कर्म कर सकते हैं.

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इस अवधि में दान-पुण्य, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता करना अत्यंत शुभ फल देता है. साथ ही ध्यान, मंत्र-जप और नियमित प्रार्थना मन को शांत और स्थिर बनाती है. आप चाहें तो गायत्री मंत्र या विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ कर आध्यात्मिक बल और सकारात्मक कंपन बढ़ा सकते हैं.

इसके अलावा तुलसी, पीपल, सूर्य और गुरु ग्रह की पूजा करना भी बेहद लाभकारी माना गया है, क्योंकि यह जीवन में शुभता और स्थिरता लाता है. घर में स्वच्छता, दीपक जलाना, धूप-दीप लगाना और सकारात्मक वातावरण बनाए रखना इस समय विशेष रूप से फलदायी माना गया है.

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खरमास में ये काम हैं वर्जित

खरमास के दौरान कुछ कार्यों को करने से बचना ही श्रेष्ठ माना गया है. इस अवधि में नए घर में प्रवेश, विवाह, सगाई या किसी भी तरह के शुभ मांगलिक कार्यक्रम नहीं किए जाते, क्योंकि गुरु की शुभ ऊर्जा कमजोर मानी जाती है. इसी प्रकार नए वाहन की खरीद, बहुत बड़ी आर्थिक खरीदारी या निवेश भी टालने की सलाह दी जाती है.

खरमास में नए निर्माण कार्य, नया बिज़नेस शुरू करना या किसी बड़े प्रोजेक्ट की शुरुआत भी उचित नहीं मानी जाती. यह समय स्थिरता और दृढ़ शुभ फल देने वाला नहीं होता, इसलिए शुरुआत को आगे बढ़ा देना ही समझदारी है.

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इसके अलावा इस अवधि में गुस्सा, विवाद, कटु वाणी या किसी भी तरह की नकारात्मकता से दूर रहना चाहिए. यह माह शांत मन, सद्भाव और आत्मचिंतन का होता है, इसलिए अच्छे विचार, सद्भाव और सकारात्मक सोच अपनाना सबसे अधिक लाभकारी माना गया है.

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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