Hindu New Year: हिंदू धर्म में हिंदू नववर्ष वह दिन होता है, जब पंचांग के अनुसार नया साल आरंभ होता है. यह अंग्रेजी कैलेंडर की तरह 1 जनवरी से शुरू नहीं होता है, क्योंकि हिंदू धर्म में समय की गणना अलग ढंग से की जाती है, इसलिए नववर्ष की तिथि भी अलग होती है. प्राचीन परंपराओं के अनुसार इसी दिन से नए और शुभ कार्यों की शुरुआत की जाती है. इस दिन को आत्मचिंतन और नए संकल्पों का दिन भी माना जाता है. आइए जानते हैं, इस साल के हिंदू नववर्ष का नाम क्या है, कब शुरू होगा और यह चैत्र से क्यों आरंभ होता है?
हिंदू नववर्ष का नाम क्या है?
भारत में दो कैलेंडर बेहद प्रसिद्ध विक्रम संवत और शक संवत, जिसे लेकर लोग कन्फ्यूज रहते हैं कि हिंदू वर्ष और कैलेंडर कौन-सा है. आपको बता दें हिन्दू संस्कृति में सदियों से विक्रम संवत को ही हिंदू कैलेंडर को कहा जाता है. इसका नाम उज्जैन के राजा विक्रमादित्य के नाम पर पड़ा है. यह संवत अंग्रेजी कैलेंडर से लगभग 57 वर्ष आगे चलता है. जब अंग्रेजी वर्ष 2026 होता है, तब विक्रम संवत 2082 चल रहा होता है. हिंदू धर्म के सभी व्रत, त्योहार और शुभ मुहूर्त इसी संवत के आधार पर तय किए जाते हैं. यह कैलेंडर प्राचीन ज्ञान और खगोलीय गणना पर आधारित है. शक संवत का उपयोग भारत सरकार द्वारा ‘श्वेत पत्र’ निकालने में किया जाता है.
नया हिंदू वर्ष कब शुरू होगा?
इस वर्ष हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होगी. यह तिथि 19 मार्च 2026 को पड़ रही है. इसी दिन से विक्रम संवत 2083 आरंभ होगा. हिंदू नववर्ष के पहले दिन गुड़ी पड़वा का पर्व मनाया जाता है. इसी दिन से वसंत नवरात्रि की भी शुरुआत होती है. हिन्दू धर्म में यह दिन विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
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इस साल का संवत्सर क्या है?
हिंदू पंचांग में हर वर्ष का एक विशेष नाम होता है, जिसे ‘संवत्सर’ कहा जाता है. वर्तमान में विश्वावसु नाम का संवत्सर चल रहा है. 19 मार्च 2026 से सिद्धार्थी नाम का संवत्सर शुरू होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस वर्ष के राजा गुरु बृहस्पति ग्रह और मंत्री मंगल ग्रह माने गए हैं. गुरु ज्ञान, धर्म और विस्तार के प्रतीक हैं, जबकि मंगल ऊर्जा और साहस का कारक माने जाते हैं.
हिन्दू वर्ष के महीनों के नाम
हिंदू कैलेंडर में कुल बारह महीने होते हैं. इनके नाम हैं चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, सावन, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन. इस बार ज्येष्ठ मास का अधिकमास भी रहेगा. इसी कारण यह वर्ष 13 महीनों का माना जाएगा. अधिकमास को धार्मिक दृष्टि से विशेष और पुण्यदायक माना जाता है.
चैत्र मास से नववर्ष क्यों शुरू होता है?
हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास से होने के पीछे धार्मिक मान्यताएं हैं. ब्रह्म पुराण के अनुसार ब्रह्मा जी ने इसी दिन सृष्टि की रचना आरंभ की थी. इसलिए इसे सृष्टि का प्रथम दिन भी कहा जाता है. चारों युगों में सबसे पहले सतयुग की शुरुआत भी इसी तिथि से मानी जाती है. कहते हैं, इसी कारण राजा विक्रमादित्य ने विक्रम संवत की शुरुआत चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से की.
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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।
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